परीक्षा पे चर्चा
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परीक्षा के दिनों में तनाव, डर और दबाव लगभग हर छात्र की जिंदगी का हिस्सा बन जाता है। इसी चिंता को दूर करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ के 9वें संस्करण के दूसरे एपिसोड में छात्रों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ पढ़ाई से जुड़े तनाव पर बात की, बल्कि जीवनशैली, सेहत, रचनात्मकता और भविष्य की तैयारी को लेकर भी अहम संदेश दिए।
🧠 तनाव से निपटने का आसान तरीका
प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को सलाह दी कि परीक्षा को जीवन का अंतिम पड़ाव न मानें। उन्होंने कहा कि तनाव का सबसे बड़ा कारण डर होता है और डर तब आता है, जब हम खुद पर भरोसा नहीं करते।
उन्होंने सांस लेने की प्रक्रिया पर जोर देते हुए कहा—
“सांस इतनी गहरी लो कि शरीर भर जाए। यह शरीर और मन दोनों को शांत करता है।”
पीएम मोदी ने बताया कि शरीर को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है, लेकिन अक्सर लोग इसे सबसे आखिर में रखते हैं। नियमित दिनचर्या, सही नींद और सुबह सूर्योदय देखने जैसी आदतें शरीर में ताजगी भर देती हैं।
🥗 डाइट पर पीएम मोदी का खुला जवाब
गुवाहाटी के एक छात्र के सवाल पर प्रधानमंत्री ने अपनी डाइट को लेकर बेहद सहज जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनकी कोई तय डाइट नहीं रही, क्योंकि वे लगातार अलग-अलग जगहों पर जाते रहे।
- जो उपलब्ध होता था, वही खा लेते थे
- कई बार खुद खाना बनाना पड़ता था
- खिचड़ी जैसे सरल भोजन पर भी निर्भर रहे
इसका संदेश साफ था—शरीर के संकेतों को समझें और जरूरत के अनुसार खान-पान रखें।
📚 पढ़ाई और जुनून के बीच संतुलन
प्रधानमंत्री ने छात्रों को पढ़ाई और रचनात्मक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि:
- अकादमिक पढ़ाई और रचनात्मकता विरोधी नहीं हैं
- कला, संगीत, लेखन और अन्य शौक तनाव कम करते हैं
- रचनात्मक गतिविधियां मानसिक थकान से राहत देती हैं
उनका मानना है कि जब छात्र अपनी रुचियों को समय देते हैं, तो पढ़ाई में भी बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं।
🇮🇳 ‘वोकल फॉर लोकल’ और विकसित भारत का सपना
‘परीक्षा पे चर्चा’ के दौरान पीएम मोदी ने छात्रों को राष्ट्रीय जिम्मेदारियों से भी जोड़ा।
उन्होंने कहा कि:
- भारतीय उत्पादों को अपनाने से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है
- ‘वेड इन इंडिया’ जैसे अभियान देश के भीतर संसाधनों को बढ़ावा देते हैं
- हर छोटा कदम 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान देता है
🚀 स्टार्ट-अप और उद्यमिता का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को बड़े सपने देखने और छोटी शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि:
- बड़े विचार अक्सर छोटे स्टार्ट-अप से जन्म लेते हैं
- उद्योग के पेशेवरों से जुड़ना जरूरी है
- किताबों से आगे जाकर व्यावहारिक अनुभव लें
उन्होंने छात्रों को वास्तविक दुनिया की कार्यप्रणाली समझने और जमीनी अनुभव हासिल करने की सलाह दी।
✨ छात्रों के लिए सबसे बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री मोदी का साफ संदेश था—
परीक्षा जीवन का हिस्सा है, जीवन खुद परीक्षा नहीं।
अगर छात्र अपने शरीर, मन और रुचियों का संतुलन बनाए रखें, तो न सिर्फ परीक्षा बल्कि जीवन की हर चुनौती को आत्मविश्वास के साथ पार कर सकते हैं।