‘मैं वंदे भारत से भी यूक्रेन जा सकता था’, 10 घंटे की ट्रेन यात्रा के सवाल पर जयशंकर ने मजाकिया अंदाज में दिया जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया यूक्रेन की ट्रेन यात्रा के बारे में बात करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि ‘मैं वंदे भारत से यात्रा कर सकता था’. उन्होंने कहा कि वह दोनों तरफ से 10-10 घंटे की लंबी यात्रा थी और उस स्थिति में यही एकमात्र विकल्प था. पीएम मोदी की यूक्रेन यात्रा युद्ध से जूझ रहे देश में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा थी. 

प्रधानमंत्री मोदी की यूक्रेन की ट्रेन यात्रा के बारे में ईटी वर्ल्ड लीडर्स फोरम में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए जयशंकर ने हंसते हुए कहा, ‘मैं वंदे भारत से भी जा सकता था.’ उन्होंने कहा, ‘वह दोनों तरफ से 10-10 घंटे की यात्रा थी और स्थिति को देखते हुए, आपको जो मिला, वो मिला लेकिन 10 घंटे तो 10 घंटे ही होते हैं.’

उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा, ‘मुझे याद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इससे पहले जापान में शिंकानसेन बुलेट ट्रेन से यात्रा की थी.’ उनसे किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आखिरी बार ट्रेन की यात्रा करने को लेकर सवाल पूछा गया था.

पीएम मोदी ने पिछले हफ्ते अपनी यूक्रेन यात्रा के दौरान राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की के साथ व्यापक वार्ता की और यूक्रेन तथा रूस के बीच जारी संघर्ष का समाधान निकालने के लिए एक-दूसरे से बातचीत की जरूरत पर बल दिया. इस दौरान प्रधानमंत्री ने यूक्रेन के राष्ट्रपति को भारत आने का निमंत्रण भी दिया.

इस पर जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें ‘महान’ देश की यात्रा करके खुशी होगी. दोनों नेताओं के बीच बातचीत के बाद मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पुष्टि की कि मोदी ने जेलेंस्की को भारत आने का निमंत्रण दिया है. उन्होंने कहा, ‘यह महत्वपूर्ण है कि हमारे प्रधानमंत्री ने 1992 के बाद पहली बार यूक्रेन का दौरा किया है. ऐसे अवसरों पर यह स्वाभाविक है कि वह निमंत्रण दें, जैसा कि उन्होंने इस मामले में किया.’

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, ‘इसलिए हम उम्मीद करते हैं कि अपनी सुविधा के अनुसार, राष्ट्रपति जेलेंस्की भारत आएंगे.’ संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि मोदी ने जेलेंस्की को अपनी सुविधा के अनुसार भारत आने का निमंत्रण दिया.

मोदी के निमंत्रण के बारे में पूछे जाने पर जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें भारत आकर खुशी होगी. उन्होंने कहा, ‘हां, क्योंकि जब आप रणनीतिक साझेदारी शुरू करते हैं और आप कुछ बातचीत शुरू करते हैं तो मुझे लगता है कि आपको समय बर्बाद करने और बहुत देर तक रुकने की जरूरत नहीं है. इसलिए मुझे लगता है कि फिर से मिलना अच्छा होगा.’ यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि भारत उनके देश के पक्ष में हो.

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