मुझे नहीं लगता आप दिलचस्पी दिखा रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट ने ED को लताड़ा; जानिए क्या है मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई 6 हफ्ते के लिए टाल दी। इस याचिका में केरल गोल्ड स्मगलिंग केस को केरल से कर्नाटक ट्रांसफर करने का अनुरोध किया गया था। न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय और एसवीएन भट्टी की पीठ ने ईडी के वकील द्वारा अनुरोध किए जाने के बाद यह आदेश पारित किया। ईडी की ओर से पेश अधिवक्ता विवेक गुर्नानी ने अदालत से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू की अनुपलब्धता का हवाला देते हुए स्थगन की मांग की। उन्होंने अदालत से पहले की स्थगन याचिकाओं के लिए माफी भी मांगी।

न्यायमूर्ति रॉय की तीखी टिप्पणी

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति रॉय ने ईडी के बार-बार स्थगन मांगने पर कहा, “मुझे नहीं लगता कि आप वास्तव में दिलचस्पी रखते हैं… कभी एएसजी उपलब्ध नहीं होते, तो कभी कोई और समस्या सामने आती है।” केरल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी ईडी के इस रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लगातार स्थगन मांगने से स्पष्ट होता है कि ईडी इस याचिका को गंभीरता से नहीं ले रहा है।

हालांकि, अदालत ने ईडी के अनुरोध को मानते हुए आदेश दिया कि “याचिकाकर्ता की ओर से फिर से स्थगन का अनुरोध किया गया है। प्रतिवादी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि बार-बार स्थगन का अनुरोध इस बात का संकेत है कि याचिकाकर्ता ट्रांसफर याचिका को लेकर गंभीर नहीं है। फिर भी, याचिकाकर्ता का अनुरोध स्वीकार करते हुए, मामले की सुनवाई 6 हफ्ते के लिए स्थगित की जाती है।”

केरल गोल्ड स्मगलिंग मामला: एक नजर में

यह मामला जुलाई 2020 में त्रिवेंद्रम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ₹14.82 करोड़ की सोने की तस्करी के पकड़े जाने के बाद सामने आया। यह सोना कथित तौर पर राजनयिक सामान में छिपाकर यूएई के वाणिज्य दूतावास के पते पर भेजा गया था। इस मामले में एनआईए ने यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया और कोच्चि की विशेष एनआईए अदालत में इसकी सुनवाई हो रही है। ईडी ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत इस मामले को एर्नाकुलम की विशेष पीएमएलए अदालत से कर्नाटक की विशेष अदालत में ट्रांसफर करने की मांग की है।

ईडी का आरोप

ईडी ने अपनी याचिका में कहा है कि इस मामले के आरोपी – एम शिवशंकर, पीएस सारिथ, स्वप्ना सुरेश और संदीप नायर – प्रभावशाली हैं और केरल सरकार के शीर्ष अधिकारियों के करीबी हैं। ईडी का कहना है कि इन परिस्थितियों में, केरल में इस मामले की निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है। अक्टूबर 2022 में, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केरल सरकार को पक्षकार बनाए जाने की अनुमति दी थी और उसे अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया था।

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