मर जाऊंगा, पाकिस्तान नहीं जाऊंगा; 27 साल पुलिस में रहे कांस्टेबल पर लटकी तलवार

रीनगर. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से भारत की सुरक्षा एजेंसियां देश में रहे पाकिस्तानी नागरिकों को खोजकर निकाल रही हैं और उन्हें पाकिस्तान भेज रही हैं। भारत सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों को दिए गए सभी प्रकार के वीजा रद्द करते हुए उन्हें 30 अप्रैल तक देश छोड़ने का आदेश दिया था। इस बीच खबर है कि कुछ ऐसे लोगों को भी पाकिस्तान जाने का आदेश मिला है जो पिछले कुछ दशकों से भारत में रहे रहें। इनमें जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक पूर्व कांन्स्टेबल का नाम भी सामने आया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर पुलिस में 27 साल सेवा दे चुके कांस्टेबल इफ्तिखार अली को हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा ‘भारत छोड़ो’ नोटिस भेजा गया था। 26 अप्रैल को जब एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें फोन कर बताया कि उन्हें और उनके आठ भाई-बहनों को पाकिस्तान का नागरिक मानते हुए भारत छोड़ने का आदेश दिया गया है, तो 45 वर्षीय इफ्तिखार अली के पैरों तले जमीन खिसक गई। रिपोर्ट के मुताबिक, इफ्तिखार अली ने कहा, “मैं मर जाऊंगा, लेकिन पाकिस्तान नहीं जाऊंगा। मैंने अपने वरिष्ठ अधिकारी से कहा – अगर मुझे पाकिस्तान भेजा गया तो मैं मर जाऊंगा।”
हाईकोर्ट से राहत

पहलगाम आतंकी हमले के बाद 29 अप्रैल को इफ्तिखार और उनके आठ भाई-बहनों को यह नोटिस थमाया गया। लेकिन तीन दिन के भीतर ही जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगाते हुए केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को उन्हें जबरन देश से बाहर भेजने से रोक दिया। यह आदेश इफ्तिखार द्वारा दायर की गई याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने बताया कि उनके पिता फखरुद्दीन 1955 के नागरिकता कानून के अनुसार भारत के नागरिक और जम्मू-कश्मीर के ‘हेरिडिटरी स्टेट सब्जेक्ट’ थे।

फिलहाल अली और उनके आठ भाई-बहन- 49 वर्षीय बड़े भाई जुल्फकार अली, 60 वर्षीय मोहम्मद शफीक, और 52 वर्षीय मोहम्मद शकूर; और उनकी बहनें 42 वर्षीय शाजिया तब्सम, 47 वर्षीय कौसर परवीन, 50 वर्षीय नसीम अख्तर, 54 वर्षीय अकसीर अख्तर, और 56 वर्षीय नशरून अख्तर अब गांव लौट आए हैं। हालांकि उन्हें नोटिस मिला, लेकिन न तो उनकी पत्नी और न ही उनके तीन नाबालिग बेटों को नोटिस मिला, “क्योंकि वे सभी भारत में पैदा हुए थे, इसलिए उन्हें नोटिस नहीं मिला।”

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