चमत्कार नहीं तो क्या? कई टन मलबे के नीचे दबी रही लड़की; मंडी में 5 घंटे बाद जिंदा निकली बाहर

कहते हैं कि जिसकी जिंदगी है, उसे कोई नहीं मार सकता है। फिर चाहे उसके ऊपर पहाड़ गिर जाए या वो पहाड़ से गिर जाए। कुछ ऐसा ही हुआ है हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में। यहां बीते दिनों बादल फटने के बाद आई भीषण बाढ़ ने कई घरों को तबाह कर दिया और कई जिंदगियां लील लीं। ऐसी ही एक घटना का शिकार हुईं मंडी की सेराज घाटी में रहने वाली तुनेजा ठाकुर। तुनेजा ठाकुर बाढ़ आने के बाद मलबे में करीब 5 घंटे तक दबी रहीं और खुद को जिंदा रखा। आखिर में मौत हार गई और तुनेजा को जिंदा बचा लिया गया।

कैसे बची जिंदा

मामला मंडी जिले के सेराज घाटी का है। यहां के शरण गांव में भूस्खलन के कारण एक 20 साल की युवती भारी मलबे के नीचे दब गई। इस दौरान मिट्टी, पत्थर और मलबे के भार के नीचे दबी तुनेजा पर भार बढ़ता ही जा रहा था। मौत को सामने देखकर भी तुनेजा ने हार नहीं मानी और जिंदा रहने के दृढ़ निश्चय ने उसे बचा लिया। तुनेजा को पता था कि उसकी जिंदगी का ये आखिरी पल हो सकता है, लेकिन उसने हार नहीं मानी। तुनेजा लगातार अपने ऊपर से कीचड़ हटाती रही और सांस लेने के लिए जगह बनाती रही। तुनेजा ने खुद को तब तक जिंदा रखा, जब तक कि उसे बचा नहीं लिया गया।

भूस्खलन के बाद जब लड़की लापता हो गई तो परिवार वालों ने घंटों तलाश की। 5 घंटों के बाद लड़की एक मलबे के नीचे मिली। उसने घरवालों से बताया कि मलबे के नीचे दबे होने के दौरान एक-एक सेकंड कई घंटों के बराबर लग रहा था। उसने बताया कि उसे पता था कि वो जिंदा बाहर आ जाएगी और आखिर में घरवालों ने उसे जिंदा बाहर निकाल ही लिया। तुनेजा ने भयावह मंजर के बारे में बात करते हुए कहा कि आपदा आने के बाद सब लोग बाहर की तरफ भागे। तुनेजा ने बताया कि घरों में पानी भरता देख लोग डर के मारे चीख रहे थे और मैं सुरक्षित जगह की तलाश में घर से बाहर की तरफ भागी, तभी जमीन का एक हिस्सा दरक गया और मैं उसके नीचे दबी रह गई।

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