कोलकाता डॉक्टर मर्डर केस: तो बच जाती लेडी डॉक्टर की जान! दरिंदे संजय पर हुआ बड़ा खुलासा, क्यों खुद को नहीं …

कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में ट्रेनी लेडी डॉक्टर से दरिंदगी करने वाले आरोपी संजय रॉय को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. सूत्रों का कहना है कि लेडी डॉक्टर के कातिल संजय रॉय ने उसके चिल्लाने की वजह से गला दबाकर मारा था. सजंय रॉय बाक्सिंग का अच्छा खिलाड़ी था, इस वजह से लेडी डॉक्टर ताकत में उससे जीत नहीं पाई और अपना बचाव नहीं कर पाई. अगर संजय रॉय बॉक्सिंग प्लेयर नहीं होता तो शायद जूनियर डॉक्टर उसके चंगूल से अपनी जान बचा लेती. बता दें कि 8 अगस्त की रात को आरोपी संजय ने आरजी कर अस्पताल के सेमिनार हॉल में ट्रेनी लेडी डॉक्टर का रेप किया था और उसके बाद उसकी गला दबाकर हत्या कर दी थी.

सूत्रों बताया कि कोलकाता कांड का आरोपी सजंय रॉय बाक्सिंग का बहुत अच्छा खिलाड़ी था. यही वजह है कि पीड़िता यानी कि ट्रेनी लेडी डॉक्टर उसके हाथों से खुद का बचाव नहीं कर पाई. जब तक पीड़िता की जान न निकल गई, तब तक दरिंदे सजंय रॉय ने उसका गला दबाकर रखा. जब दरिंदा संजय उस लेडी डॉक्टर का रेप कर रहा था, तब पीड़िता ने अपने बचाव के लिए आवाज भी लगाई. वो खूब चिल्लाई, मगर उसकी आवाज उस हॉल से बाहर नहीं आ पाई. इसके बाद पीड़िता के चिल्लाने की वजह से संजय रॉय को पकड़े जाने का डर हो गया. यही वजह है कि उसने रेप के बाद उसे मारने का मन बना लिया. उसने अपनी हाथों की पूरी ताकत से पीड़िता का गला दबाया. और तब तक दबाकर रखा, जब तक पीड़िता की जान नहीं निकल गई.


दरअसल, खुद आरोपी संजय ने सीबीआई के सामने इन सभी बातों को कबूल कर लिया है. आरोपी संजय ने पूछताछ और पॉलीग्राफ टेस्ट में कबूल किया है कि उसने ही ट्रेनी डॉक्टर की गला दबाकर हत्या की है. सूत्रों की मानें तो संजय रॉय ने कहा, ‘पीड़िता लगातार चिल्ला रही थी, इसलिए मैंने उसका जोर से गला दबाया और तब तक दबाकर रखा, जब तक उसने दम नहीं तोड़ दिया.’ बता दें कि 9 अगस्त को आरजी कर अस्पताल के सेमिनार हॉल में ट्रेनी लेडी डॉक्टर का शव मिला था. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसके साथ रेप की पुष्टि की गई. इसके बाद 10 अगस्त को सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संजय रॉय को गिरफ्तार किया गया था.


संजय रॉय इस कोलकात कांड का मुख्य आरोपी है. वह साल 2019 से नागरिक स्वयंसेवक के रूप में कोलकाता पुलिस के साथ काम कर रहा था. संजय रॉय ने पिछले कुछ सालों में कुछ सीनियर पुलिस अधिकारियों से कथित तौर पर करीबी बना ली थी, जिसके बाद उसे कोलकाता पुलिस कल्याण बोर्ड में शामिल किया गया और आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की पुलिस चौकी में तैनात कर दिया गया था. शुरू में उसने अपने खिलाफ आरोपों से इनकार किया था

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