भारत से दोस्ती चाहते हैं तो. अमेरिकी डिप्लोमैट ने चुनाव के बीच कही अहम बात

अमेरिका के एक शीर्ष डिप्लोमैट ने कहा है कि भारत-अमेरिका संबंधों के लिए प्रवासियों को ‘शैतान’ कहकर संबोधित करने से ज्यादा खतरनाक कुछ नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि प्रवासियों के खिलाफ होना और भारत-अमेरिका के बीच मजबूत संबंधों की वकालत करना संभव नहीं है. 

प्रबंधन और संसाधन मामलों के उप विदेश मंत्री रिचर्ड वर्मा ने हडसन इंस्टीट्यूट में भारत-अमेरिका संबंधों पर बोलते हुए ये टिप्पणी की.

उन्होंने यह टिप्पणी डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी के रूप में उभरी धुर-दक्षिणपंथी सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर लॉरा लूमर की कमला हैरिस के खिलाफ बयानबाजी पर की. लूमर ने अमेरिकी उप-राष्ट्रपति के भारतीय मूल के होने को लेकर उन पर हमला किया था. अमेरिका में प्रवासियों के खिलाफ रिपब्लिकन पार्टी की मुहिम को आगे ले जाने में लूमर अहम भूमिका निभा रही हैं.

भारत में अमेरिका के राजदूत रह चुके रिचर्ड वर्मा ने अमेरिका के अलग-अलग क्षेत्रों में भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के लोगों के योगदान पर बात करते हुए कहा, ‘इस नजरिए को समझना बेहद कठिन है कि अमेरिका-भारत आर्थिक, सुरक्षा और सांस्कृतिक संबंधों का पक्षधर होकर कोई प्रवासी विरोधी कैसे हो सकता है. ये दोनों एक साथ नहीं चलते.’

अमेरिकी राज्य ओहायो में हैती से आकर बसे प्रवासियों के खिलाफ चलाए जा रहे रिपब्लिकन पार्टी के कैंपेन के संदर्भ में रिचर्ड वर्मा ने कहा कि प्रवासियों को शैतान की तरह पेश किया जा रहा है. दरअसल, रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने कमला हैरिस से पहली प्रेसिडेंशियल डिबेट में कहा था कि हैती से अवैध तरीके से आए प्रवासी स्थानीय लोगों के कुत्ते-बिल्लियों को चुराकर उनका मांस खा रहे हैं.

रिचर्ड वर्मा ने कहा, ‘हाल के दिनों में साइबर स्पेस और टीवी पर हमने देखा है कि प्रवासियों को शैतान की तरह पेश किया जा रहा है, जिसमें भारतीय अमेरिकियों पर किए गए घृणित और नस्लवादी हमले शामिल हैं, इससे ज्यादा खतरा या नुकसान अमेरिका-भारत संबंधों के लिए कुछ नहीं हो सकता है.’

वर्मा ने कहा कि वह यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि इस प्रकार की भाषा और ऐसे हमलों के लिए अमेरिकी समाज में कोई जगह नहीं है.

रिचर्ड वर्मा ने कहा कि चीन और रूस भारत-अमेरिका के मजबूत होते संबंधों को लेकर चिंतित हैं. डिप्लोमैट ने रूस-चीन पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत-अमेरिका संबंध अमेरिका के कुछ विरोधियों के कामकाज के तरीके से “बहुत अलग” है. उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने के साथ-साथ शांति और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देते हैं.

उन्होंने कहा, ‘सच कहूं तो, आपको क्यों लगता है कि चीन और रूस इस साझेदारी को लेकर इतने चिंतित हैं? क्योंकि हम बाकी की दुनिया के लिए जीने का एक अलग तरीका लेकर आए हैं जो सबको साथ लेकर चलने, शांति, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, कानून के शासन और समाज में हर किसी की आवाज सुनने के बारे में है.’

राजनयिक ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों की यही खासियत है जिसके कारण राष्ट्रपति जो बाइडेन दोनों देशों के संबंधों को सदी के बेहतरीन संबंधों के रूप में देखते हैं.

उन्होंने याद किया कि लगभग 20 साल पहले, जब वह सीनेट में तत्कालीन सीनेटर बाइडेन और स्टाफ डायरेक्टर टोनी ब्लिंकन के साथ खड़े थे, बाइडेन ने कहा था कि अगर 2020 तक अमेरिका और भारत सबसे करीबी दोस्त और साझेदार बन जाते हैं तो दुनिया अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित होगी.

उन्होंने आगे कहा, ‘केवल इसलिए नहीं कि दोनों देशों के पास बड़ी सेनाएं हैं, केवल इसलिए नहीं कि दोनों देश बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं, बल्कि इसलिए कि दोनों ही देश ऐसे मुद्दों पर अपना स्टैंड लेते हैं जो दुनिया भर में लोगों के दैनिक जीवन में मायने रखती है.’

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के संगठन QUAD को लेकर किए गए एक सवाल के जवाब में डिप्लोमैट ने कहा कि इस संगठन का उद्देश्य शांति, सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देना है.

उन्होंने कहा कि क्वाड ने टेक्नोलॉजी के लिए अच्छी घोषणाएं की है, लोगों की भलाई के लिए टेक्नोलॉजी पर फोकस किया है. उन्होंने कहा कि संगठन ने प्रमुख सिद्धांतों का एक सेट तैयार किया है और क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा पर सहयोग किया है.

क्वाड को चीन का मुकाबला करने के लिए बनाए गए संगठन के रूप में देखा जाता है. हालांकि, यह संगठन सैन्य मुद्दों से दूर रहा है और भारत का खास जोर रहता है कि सैन्य मुद्दों को क्वाड से दूर रखा जाए.

इसे लेकर अमेरिकी डिप्लोमैट ने कहा, ‘जब मैं देखता हूं कि क्वाड ने ऊर्जा परिवर्तन, व्यापार, नियम-आधारित व्यवस्था को लेकर काम किए हैं तो मुझे नहीं लगता कि इसे सैन्य चरित्र अपनाना चाहिए. भारतीय इसका समर्थन नहीं करते हैं. सच कहूं तो मुझे नहीं लगता कि हमें इसकी जरूरत है. मुझे लगता है कि मुख्य सैन्य मुद्दों से निपटने के लिए बाकी संगठन भी हैं.’

क्वाड को लेकर रिचर्ड वर्मा ने कहा कि यह संगठन समान विचारधारा वाले देशों का है.

अगले हफ्ते क्वाड की बैठक होने वाली है जिसकी मेजबानी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन करेंगे. बाइडेन चौथे व्यक्तिगत क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन की बैठक अपने डेलावेयर स्थित निवास पर आयोजित कर रहे हैं.

इस साल क्वाड की मेजबानी भारत करने वाला था लेकिन अब भारत में क्वाड की बैठक अगले साल आयोजित की जाएगी.

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