बांग्लादेश से आयात होने वाले कपड़ा कारोबार पर भी असर।

बांग्लादेश में बगावत की आग की आंच सहारनपुर के वुड कार्विंग उद्योग के निर्यात पर भी पड़ रही है। निर्यात के साथ घरेलू मार्केट पर भी इसका व्यापक असर पड़ रहा है और आने वाले समय में और पड़ेगा। सहारनपुर से 10 से 12 निर्यातक सीधे बांग्लादेश को लकड़ी से बने उत्पाद निर्यात करते हैं। महीने का 10 से 15 करोड़ रुपये का सहारनपुर से सीधे निर्यात बांग्लादेश को है। बांग्लादेश से कपड़ा बड़ी मात्रा में आयात होता है।

पड़ोसी देश बांग्लादेश में आरक्षण को लेकर धधकी आग थमने का नाम नहीं ले रही है। प्रधानमंत्री ने त्यागपत्र देकर देश छोड़ दिया है। बवाल का सीधा असर अर्थव्यवस्था व कारोबार पर आ रहा है। उत्पादन, ट्रांसपोर्टेशन, निर्यात, भुगतान सब प्रभावित हो गया है। सहारनपुर के उद्यमियों व कारोबारियों को करोड़ों रुपये के भुगतान की चिंता सता रही है।

काष्ठनगरी औद्योगिक संस्थान समेत अन्य हिस्सों से लोग बाहरी राज्यों को भी माल भेजते है। वहां से माल बांग्लादेश को जाता है। लेकिन अब वहां के हालात को देखते हुए पार्टियों ने आर्डर रोक दिए हैं। ट्रांसपोर्टरों के गोदामों में करोड़ों रुपये माल फंस गया है। आर्डर पर भेजे गए माल का भुगतान अटका गया है।


सहारनपुर से पश्चिम बंगाल पांच से आठ ट्रक माल रोजाना जाता हैं। इसमें लकडी से बने उत्पाद के अलावा खाद्य साम्रगी आदि शामिल है। बाग्लादेश के हालात को देखते हुए उद्यमी, निर्यातक व ट्रांसपोर्टर चिंतित हैं। हालात में सुधार होने तक कई सौ करोड़ रुपये से अधिक कारोबार प्रभावित होने की संभावना जतायी जा रही है। मौजूदा समय में ही करोड़ों रुपये का भुगतान रुक गया है।


रामा कृष्णा ट्रांसपोर्टर के स्वामी, तेजपाल सिंह ने कहा कि बांग्लादेश में हालात बेकाबू होने पर कोलकाता की पार्टियों ने भी माल लेने से इनकार कर दिया है। सहारनपुर में दर्जन भर से ज्यादा ऐसे उद्यमी है जो सीधे कोलकाता पार्टियों को माल भेजते हैं। वहां से माल बांग्लादेश को भेजा जाता है। आर्डर रोके जाने का असर ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर देखने को मिल रहा है। माल लोडिंग का काम बंद कर दिया गया है।

उप्र मोटर ट्रांसपोर्टरफेडरेशन के अध्यक्ष, ब्रित चावला ने कहा कि सहारनपुर के बांग्लादेश की सीमा तक माल पहुंचवाया जाता है। लेकिन, बांग्लादेश में हिंसा के चलते वह अटक गया है। सीमा से लगे पश्चिम बंगाल के लिए जाने वाला सामान सहारनपुर से कई पार्टियां भेजती है। लेकिन, बांग्लादेश में जो हालात बने है उससे पार्टियां माल नहीं मंगा रही हैं। जिसके कारण गोदामों में माल पड़े हैं। आने वाले दिनों में इसको लेकर बड़ा आर्थिक संकट सामने आ सकता है।

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