तेन्दूपत्ता संग्रहण
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तेन्दूपत्ता, जिसे छत्तीसगढ़ में हरा सोना भी कहा जाता है, राज्य की वन अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह विशेष रूप से बीड़ी उद्योग में उपयोग होता है और ग्रामीणों के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनता है। मार्च और अप्रैल में तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले, उसे उच्च गुणवत्ता वाले बनाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से शाखा-कर्तन (बूटा कटाई) की प्रक्रिया की जाती है। इस प्रक्रिया में झाड़ियों की छंटाई की जाती है, ताकि नई कोमल पत्तियाँ निकल सकें, जो बीड़ी उद्योग के लिए आदर्श मानी जाती हैं।
शाखा-कर्तन कार्य के लिए कार्यशाला का आयोजन
कोरिया वनमंडल द्वारा तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन कार्य के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में वन विभाग के अधिकारियों, फड़मुंशी, प्रबंधक, पोषक अधिकारी और अन्य कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला का उद्देश्य यह था कि तेन्दूपत्ता संग्रहण में शामिल सभी लोगों को इस प्रक्रिया की सही जानकारी और दिशा-निर्देश दिए जा सकें।
तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन क्यों जरूरी है?
तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन करना जरूरी है क्योंकि इससे नई और उच्च गुणवत्ता वाली पत्तियाँ उत्पन्न होती हैं। यह प्रक्रिया पत्तियों की गुणवत्ता को बेहतर बनाती है, जिससे संग्रहण के बाद उत्पादित तेन्दूपत्ता की कीमत भी अधिक मिलती है।
कार्यशाला के दौरान दिया गया प्रशिक्षण
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने शाखा-कर्तन की सही तकनीक और तेन्दूपत्ता तोड़ाई की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी। परिक्षेत्र अधिकारी देवगढ़ ने तेन्दूपत्ता की बूटा कटाई, फड़ों के चयन, पत्तियों की तोड़ाई, गड्डी बांधने और संग्रहण केंद्र में खरीदी की प्रक्रिया को समझाया। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया मार्च के पहले और दूसरे सप्ताह में अनिवार्य रूप से पूरी की जानी चाहिए।
भुगतान प्रक्रिया पर चर्चा
वन विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि तेन्दूपत्ता संग्राहकों को समय पर भुगतान किया जाए। साप्ताहिक खरीदी के तीसरे दिन तक संग्राहकों को उनका भुगतान मिल जाएगा। इससे उनकी आय में निरंतरता बनी रहती है और वे अपनी रोज़ी-रोटी के लिए आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए प्रेरणा
कार्यशाला में जिला यूनियन के अध्यक्ष ने अधिकारियों और कर्मचारियों को उच्च गुणवत्ता वाले तेन्दूपत्ता संग्रहण के लिए प्रेरित किया। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2026 के तेन्दूपत्ता सीजन के लिए वनमंडल की सभी लॉट पहले ही विक्रय हो चुकी हैं, जो इस प्रक्रिया की सफलता का प्रमाण है।