राजधानी लखनऊ में भवन भूखण्ड खरीदने वालों को पहले बिल्डरों ने सताया। उनकी गाढ़ी कमाई हड़प ली। मकान व प्लाट भी नहीं दिया। जब बिल्डरों से रिकवरी का आदेश हुआ तो अब तहसील के अधिकारी इसकी वसूली नहीं करा रहे हैं। आरसी तहसील के अधिकारियों ने दबा रखी है। वह वसूली के लिए तमाम बहाने बना रहे हैं। बिल्डरों से वसूली न करने से लोगों को उनके मकान का पैसा वापस नहीं मिल पा रहा है। अफसरों ने खरीददारों की वसूली की 16.12 करोड़ रुपए की आरसी दबा रखी है।
राजधानी में बिल्डरों से मकान, प्लाट, दुकान तथा फ्लैट खरीदने वाले हजारों लोग फंसे हैं। बिल्डरों ने न इन्हें इनकी सम्पत्ति दी और न पैसा वापस किया है। आज भी लोग इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं। कोई 10 वर्ष से लड़ाई लड़ रहा है तो कोई पांच वर्ष से। तमाम लोग विभिन्न अदालतों व रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी से जीत भी गये हैं। उनके पैसे की बिल्डर से वसूली के लिए यूपी रेरा ने आरसी भी जारी की है। यह आरसी भी पांच पांच वर्षों से तहसील के अधिकारियों ने दबा रखी है। बिल्डर से वसूली नहीं कर रहे हैं। केवल अंसल एपीआई बिल्डर पर ही सबसे ज्यादा 7.25 करोड़ की आरसी बकाया है।