मई में खुदरा महंगाई 3% रहने का अनुमान, सस्ती होंगी खाने-पीने की चीजें; आज आ रहे आंकड़े

नई दिल्ली: भारत की खुदरा महंगाई मई में 3 प्रतिशत कम रहने की संभावना है। यदि आंकड़े ऐसे ही रहते हैं तो ये छह साल में सबसे निचला स्तर होगा। आज गुरुवार, (12 जून) को खुदरा महंगाई के आंकडे जारी किए जाएंगे। खाने-पीने के चीजों की कीमतों में लगातार गिरावट की वजह से खुदरा महंगाई फरवरी से आरबीआई के लक्ष्य 4 फीसदी से नीचे है।

बता दें कि अप्रैल में खुदरा महंगाई दर गिरकर 3.16 प्रतिशत पर आ गई थी। ये 69 महीनों के महंगाई का निचला स्तर है। इससे पहले जुलाई 2019 में रिटेल महंगाई दर 3.15 फीसद रही थी। वहीं, मार्च 2025 में खुदरा महंगाई 3.34 प्रतिशत रही थी। ये खुदरा महंगाई दर का 5 साल 7 महीने का निचला स्तर रहा था।

RBI ने घटाया था महंगाई का अनुमान

बता दें कि इससे पहले चार से छह जून तक हुई आरबीआई मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में भी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई का अनुमान 4 प्रतिशत से घटाकर 3.7 प्रतिशत कर दिया था। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अप्रैल-जून तिमाही के लिए अपने महंगाई अनुमान को 3.6 प्रतिशत से घटाकर 2.9 प्रतिशत कर दिया।

कैसे बढ़ती है महंगाई?

महंगाई का बढ़ना और घटना किसी वस्तु की मांग और आपूर्ति पर निर्भर करता है। यदि लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा खरीदारी करेंगे। किसी भी वस्तु की अधिक खरीदारी होने से उसकी मांग बढ़ेगी और डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं होने से उस की कीमत में इजाफा होगा। ऐसे ही बाजार में महंगाई आ जाती है। इसको आसान भाषा में आप इस तरह समझ सकते हैं कि मार्केट में पैसों का अधिक फ्लो या वस्तुओं की कमी से महंगाई आ जाती है।

महंगाई कैसे तय होती है?

एक कस्टमर के रूप में आप और हम खुदरा बाजार से कोई भी सामान खरीदते हैं। इन सामानों के कीमतों में हुए बदलाव को दर्शाने का काम कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी की सीपीआई करता है। हम किसी भी उत्पाद या सेवा के लिए जो औसत कीमत चुकाते हैं, CPI उसी को मेजर करता है। कच्चे तेल, कमोडिटी की कीमतों, मैन्युफैक्चर्ड कॉस्ट के अलावा कई अन्य चीजें भी होती हैं, जो खुदरा महंगाई दर तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। करीब 300 सामान ऐसे हैं, जिनकी कीमतों के आधार पर खुदरा महंगाई का दर तय होता है।

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