बस्तर जिले के कोडेनार पंचायत अंतर्गत अवैध रेत खनन का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। महज खनिज जांच नाका से 2 किलोमीटर की दूरी पर प्रतिदिन अवैध खनन कर रेत की गाड़ियां बेरोकटोक जांच नाका से निकल रही हैं। बारिश का मौसम शुरू होते ही जून महीने से रेत का उत्खनन बंद करने का नियम है. इसके बावजूद रेत माफिया द्वारा अभी भी उत्खनन जारी है। जब हमने संबंधित अधिकारी को शिकायत किया तो शिकायत पर संबंधित अधिकारियों ने केवल खाना-पूर्ति के नाम पर दो गाड़ियों पर ही कार्रवाई की। वहीं रोजाना गाड़ियां जांच नाका से गुजरती हैं, लेकिन खनिज विभाग द्वारा उन पर किसी प्रकार की जांच नहीं की जाती।
जानकारों का मानना है कि इस लापरवाही के चलते शासन को रोजाना लाखो रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। दूसरी ओर, लगातार हो रहा अवैध रेत खनन पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंचा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित रेत उत्खनन से नदीयों की प्राकृतिक धारा बदल सकती है, तालाब-नाला सूख सकते हैं, और कृषि तथा जलस्तर पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही नदीतटीय कटाव और पुलों की संरचनात्मक क्षति का खतरा भी बना रहता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और शासन से मांग की है कि अवैध कारोबार में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली की भी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
ब्यूरो रिपोर्ट जगदलपुर से सुजीत देवनाथ