दक्षिण बस्तर के गांवों में सड़क के अभाव से मरीजों को कंधा में उठाकर ले जाना पड़ता है अस्पताल

बीजापुर। जिले के नक्सल प्रभावित दक्षिण बस्तर के गांवों व मजरे-टोले तक सड़क नहीं बनने की वजह से ग्रामीणों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है और इलाज में देरी की वजह से मरीज जान गंवा रहे हैं।इसी तरह का एक मामला पुन: एक बार सामने आया है, जिसमें भैरमगढ़ ब्लॉक के ग्राम पंचायत फुलगट्टा के आश्रित गांव पेदापाल में सड़क नही होने के कारण मरीजों को कंधा में उठाकर अस्पताल ले जाना पड़ता है, यह समस्या ग्रामीण अव्यवस्था और बुनियादी ढांचे की कमी को दर्शाती है। बीजापुर जिला छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग का हिस्सा है, जिसमें भैरमगढ़ एक बड़ा ब्लॉक है, पर यहां के दूरस्थ गांवों में सड़क और स्वास्थ्य जैसी आधारभूत सुविधाओं की स्थिति अब भी दयनीय बनी हुई है।
सरकारी दस्तावेज़ और प्रशासन का ध्यान इस ओर होने के बावजूद, फुलगट्टा और पेदापाल जैसे गांव आज भी मुख्य सड़क मार्ग से कटे हुए हैं। इसकी वजह से कोई भी मरीज, प्रसूता या आपातकालीन हालत वाली व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को घंटों पैदल चलकर, कांधा या डोली की मदद में उठाकर ले जाना पड़ता है, जिससे समय पर इलाज मिलना मुश्किल हो जाता है, और कई बार जान जोखिम में पड़ जाती है। ये समस्या केवल भैरमगढ़ ब्लॉक के एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बीजापुर जिले के कई अंदरूनी गांव इसी तरह की बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिनका मुख्य कारण सड़क और परिवहन के अभियंत्रण में पिछड़ापन है। 

गौरतलब है कि नक्सल प्रभावित जगरगुंडा से लगे पटेल पारा कमारगुड़ा गांव की निवासी 56 वर्षीय महिला बंडी मुरियामी 6 दिनों से बीमार थी। ग्रामीणों ने 12 जुलाई को बीमार महिला को खाट पर रखकर कंधे पर ढोकर 15 किमी दूरी तय कर नहाड़ी पटेल पारा आई एम्बुलेंस तक पहुंचाया। इसके बाद एम्बुलेंस में ईएमटी रेशमा कडिय़ाम पायलट अशोक सिंह ठाकुर ने प्राथमिक उपचार देकर जिला अस्पताल तक पहुंचाया, लेकिन इलाज में देरी की वजह से महिला को बचाया नहीं जा सका, बंडी मुरियामी की मौत हो गई। मृतक बंडी मुरियामी के पुत्र सुक्का मुरियामी ने बताया कि 108 के कर्मचारी व हॉस्पिटल के स्टाफ ने सही काम किया, लेकिन सड़क की स्थिति खराब होने के कारण समय पर अस्पताल नहीं पहुंचा सके।

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