5G में चीन की एंट्री भारत ने ऐसे ही नहीं रोकी… लेबनान पेजर अटैक के ये हैं सिक्योरिटी सबक!

लेबनान और सीरिया के कई शहरों में 17 सितंबर 2024 की दोपहर 3:30 बजे एक साथ हजारों धमाके हुए. ये ऐसा हमला था, जिसके बारे में किसी ने भी सोचा नहीं था. हिजबुल्लाह लड़ाकों के पास बातचीत के लिए जो पेजर मौजूद थे. वो एक के बाद एक फटने लगे. करीब पांच हजार धमाके बताए जा रहे हैं. हमले में 11 लोग मारे गए. 4000 से ज्यादा जख्मी है. हमले का आरोप इजरायल की जासूसी संस्था मोसाद पर लगाया जा रहा है.  

बेरूत में मौजूद ईरानी राजदूत मोज्ताबा अमिनी भी इस पेजर ब्लास्ट के शिकार हुए. उनकी एक आंख चली गई. इस हमले को किसने किया. कैसे किया. तरीका क्या था. इसकी जिम्मेदारी आधिकारिक तौर पर कोई नहीं ले रहा है. लेकिन आरोप इजरायल पर लग रहे हैं. अगर ऐसी स्थिति भारत में होती है तो क्या होगा? क्या ऐसी स्थिति आएगी भी?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि पेजर को हैक करके उसे रिमोटली विस्फोट करना मुश्किल है. सबसे ज्यादा संभावना इस बात की जताई जा रही है कि इजरायल ने पेजर के सप्लाई चेन में घुसपैठ करके उनमें विस्फोटक लगवाए. पेजर को विस्फोटक यंत्र बना दिया. या यूं कहें कि हथियार बना दिया. 

हमला करने के लिए पेजर्स का फिजिकल एक्सेस मिला है कहीं से. साइबर हैकिंग का मामला नहीं लगा रहा है. अगर आप सोच रहे हैं कि आपके मोबाइल किसी विदेशी संस्था द्वारा हथियार में बदला जा सकता है, तो फिलहाल आप निश्चिंत रहिए. जो पेजर फटे हैं वो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हैं, डिजिटल नहीं. ये इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर है. 

हिजबुल्लाह को ये पेजर विदेशी चैनल के जरिए मिला. इन पेजर्स के नए शिपमेंट की खुफिया जानकारी संभवतः इजरायल को मिली होगी. इस काम में मोसाद के एजेंट लगे होंगे. पेजर ब्लास्ट करने वाले हमलावरों ने इन्हें फिजिकली मॉडिफाई किया होगा. ताकि इन्हें रिमोट से फोड़ा जा सके. इन्हें एकसाथ ट्रिगर किया गया है. 

ज्यादातर फटने वाले पेजर ताइवानी कंपनी गोल्ड अपोलो के हैं. हालांकि कंपनी का कहना है कि उसने ये पेजर नहीं बनाए. इसे यूरोपियन कंपनी BAC ने बनाए हैं, जिन्होंने गोल्ड अपोलो बनाने का लाइसेंस ले रखा है. हमले के लिए सप्लाई चेन का इस्तेमाल किया गया. ऐसी कंपनी चुनी गई, जिसके बारे में दुनिया को कम पता हो. या न पता हो. 

पूरी दुनिया को पता है कि इजरायल के पास नई तकनीक को इंटरसेप्ट, हैक और ट्रैक करनी की काबिलियत है. किसी भी प्रकार के आधुनिक डिजिटल कम्यूनिकेशन सिस्टम को हैंपर कर सकते हैं. जैसे- इंटरनेट, स्मार्टफोन या लैंडलाइन. इसलिए हिजबुल्लाह ने पुरानी तकनीक पर चलने वाले पेजर का इस्तेमाल किया. ताकि सर्विलांस से बच सकें. कम इस्तेमाल होने वाले पेजर पर हैकिंग, ट्रैकिंग आसान नहीं. 

भारत ने पहले ही ऐसे हमलों को रोकने के इंतजाम कर रखे हैं. सरकार हमेशा पब्लिक कम्यूनिकेशन वाले हार्डवेयर पर नजर रखती है. उनसे पैदा होने वाली दिक्कतों को खत्म कर देती है. जैसे- भारत के 5G तकनीक में चीन जैसे देशों की घुसपैठ को रोका गया. यानी उनकी तकनीक को भारत नहीं आने दिया गया. 

ये जरूरी है कि इस तरह के हमलों से बचने के लिए विदेशी तकनीक का इस्तेमाल देश में न हो. खासतौर से दुश्मन देशों के. विदेशमंत्री एस. जयशंकर ने इस महीने के शुरूआत में ही कहा कि भारत में अपनी 5जी तकनीक बन रही है. यह काफी ज्यादा एडवांस है. लंबे समय के लिए देश की सुरक्षा के लिए यह फायदेमंद होगी. उन्होंने कहा विदेश से मंगवाए गए यंत्रों का इस्तेमाल बंद किया जाएगा. जैसे- सीसीटीवी कैमरा कहीं न कहीं से चीन से जुड़ जाती है. इनके जरिए भी सुरक्षा को खतरा रहता

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *