INS विक्रांत
भारत का शक्ति प्रदर्शन, दुनिया की नजरें विशाखापत्तनम पर
भारत एक बार फिर समुद्री ताकत के रूप में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर में निर्णायक भूमिका निभाने वाला स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत 18 फरवरी से विशाखापत्तनम में शुरू हो रहे अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू (IFR) में आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र होगा। इस वैश्विक नौसैनिक आयोजन में 60 से अधिक मित्र देशों की नौसेनाएं हिस्सा लेंगी, जो भारत की आधुनिक नौसैनिक क्षमताओं को बेहद करीब से देखेंगी।
ऑपरेशन सिंदूर में INS विक्रांत की निर्णायक भूमिका
रिपोर्ट्स के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान:
- विक्रांत कैरियर बैटल ग्रुप भारतीय नौसेना की आक्रामक रणनीति की रीढ़ बना
- उत्तरी अरब सागर में तैनाती से
- पाकिस्तान नौसेना को रक्षात्मक मोड में जाना पड़ा
- इसी दबाव के चलते संघर्षविराम की स्थिति बनी
यह पहली बार था जब स्वदेशी विमानवाहक पोत ने वास्तविक ऑपरेशनल तैनाती में अपनी रणनीतिक ताकत दिखाई।
अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू (IFR) क्या है?
अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू दुनिया का एक भव्य नौसैनिक आयोजन होता है, जिसमें:
- विभिन्न देशों की नौसेनाएं
- अपने युद्धपोत, पनडुब्बियां और नौसैनिक विमान
- एक साझा मंच पर प्रदर्शित करती हैं
इस अवसर पर:
- भारत के राष्ट्रपति, सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में
- नौसैनिक बेड़े का औपचारिक निरीक्षण करते हैं
- समुद्री सहयोग और सामरिक एकजुटता का संदेश दिया जाता है
INS विक्रांत: तकनीक, ताकत और आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक
INS विक्रांत सिर्फ एक युद्धपोत नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की समुद्री शक्ति का प्रतीक है। इसकी प्रमुख विशेषताएं:
- लंबाई: 262.5 मीटर
- चौड़ाई: 61.6 मीटर
- वजन: करीब 45,000 टन
- अधिकतम गति: 28 नॉट्स
- क्षमता: लगभग 1,600 नौसैनिकों की तैनाती
- एयर विंग:
- 30 तक लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर
- MiG-29K फाइटर जेट
- आधुनिक मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर
नाम में छुपा इतिहास और गौरव
INS विक्रांत का नाम भारत के पहले विमानवाहक पोत से लिया गया है, जिसने:
- गोवा मुक्ति अभियान
- 1971 के भारत-पाक युद्ध
में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। नया विक्रांत उसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भारत की समुद्री शक्ति को नई ऊंचाई दे रहा है।
बंगाल की खाड़ी में दिखेगा भारत का नौसैनिक आत्मविश्वास
IFR के लिए INS विक्रांत अब बंगाल की खाड़ी की ओर प्रस्थान करेगा। यहां दुनिया की प्रमुख नौसेनाएं न सिर्फ इसकी तकनीक, बल्कि भारत की रणनीतिक सोच और सैन्य आत्मविश्वास को भी परखेंगी।
‘मिलन 26’ से बढ़ेगा बहुपक्षीय सहयोग
IFR के साथ-साथ विशाखापत्तनम में:
- भारतीय नौसेना का प्रमुख बहुपक्षीय अभ्यास मिलन 26
- इसका 13वां संस्करण आयोजित होगा
- 135 से अधिक देशों को इसमें आमंत्रित किया गया है
इस अभ्यास के जरिए:
- साझा समुद्री अभ्यास
- इंटरऑपरेबिलिटी
- आपसी विश्वास और सहयोग
को और मजबूती मिलेगी।
भारत का स्पष्ट संदेश
INS विक्रांत की मौजूदगी यह साफ संदेश देती है कि:
- भारत समुद्र में अपनी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सक्षम है
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता का मजबूत स्तंभ बन चुका है
- और जरूरत पड़ने पर समुद्र से निर्णायक जवाब देने की ताकत रखता है