भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने इस बार भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई में हुई बैठक में पॉलिसी दर यानी रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखने का फैसला किया गया। इसके साथ ही आरबीआई ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी का रुख (Policy Stance) ‘न्यूट्रल’ ही बनाए रखने की बात भी कही है। आरबीआई के इस फैसले की वजहों और आगे के संकेतों पर क्या है एक्सपर्ट का राय?
आनंद राठी ग्रुप के चीफ इकनॉमिस्ट और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुजन हाजरा का कहना है कि MPC का फैसला बाजार में पहले से जाहिर किए जा रहे अनुमान के मुताबिक ही रहा। उनके मुताबिक पॉलिसी में कोई बड़ा चौंकाने वाला कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने बताया कि आरबीआई ने घरेलू मांग की मजबूती और सर्विस सेक्टर में तेजी के रुख को देखते हुए GDP ग्रोथ के अनुमान में हल्का सुधार किया है।
हाजरा का मानना है कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) यानी खुदरा महंगाई दर के अनुमान में लगभग 0.10% की बढ़ोतरी किए जाने की बड़ी वजह सोने-चांदी जैसे कीमती मेटल्स के दामों में तेजी है। हालांकि कोर इंफ्लेशन अब भी काबू में है। उनके अनुसार करीब 4% की अनुमानित महंगाई दर के साथ 5.25% की पॉलिसी रेट से पता चलता है कि RBI का झुकाव ग्रोथ को सपोर्ट करने की तरफ है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजय कुमार का कहना है कि RBI की नीति पूरी तरह उम्मीदों के अनुरूप रही। विजय कुमार के मुताबिक गवर्नर का यह बयान महत्वपूर्ण है कि हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स से ग्रोथ की रफ्तार बने रहने का संकेत मिलता है। इसके साथ ही उन्होंने ट्रेड एग्रीमेंट्स के बारे में पॉजिटिव रुख जाहिर करते हुए कहा कि इनसे निवेश और विकास की संभावनाएं बेहतर होंगी। विजय कुमार ने बैंकिंग सेक्टर के संदर्भ में आरबीआई गवर्नर के इस बयान की ओर ध्यान दिलाया कि “हाल के महीनों में बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ बढ़ी है। विजयकुमार के अनुसार इससे संकेत मिलता है कि आगे चलकर बैंकों के मुनाफे बढ़ सकते हैं, जो बैंकिंग शेयरों के लिए अच्छा संकेत हो सकता है।
एलारा कैपिटल की डिप्टी हेड ऑफ रिसर्च और इकनॉमिस्ट गरिमा कपूर का कहना है कि RBI के फैसले से साफ है कि वह पिछले रेट कट्स का असर पूरी अर्थव्यवस्था में पहुंचने देना चाहता है। उनके मुताबिक फूड प्राइसेस और बेस इफेक्ट के कारण महंगाई में आगे चलकर कुछ बढ़ोतरी हो सकती है। इस वजह से भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश कम दिख रही है। गरिमा कपूर मानती हैं कि जब तक ग्रोथ और महंगाई के बैलेंस में कोई बड़ा झटका नहीं आता, RBI लंबे समय तक दरों को स्टेबल बनाए रख सकता है।
रिजर्व बैंक के गवर्नर के मुताबिक ग्रोथ के मोर्चे पर अर्थव्यवस्था की तस्वीर मजबूत बनी हुई है। RBI ने पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 7.4% रखा है। वहीं नई GDP सीरीज लागू होने से पहले सिर्फ पहली छमाही के आंकड़े जारी किए गए हैं। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 6.9% और दूसरी तिमाही में 7.0% रहने का अनुमान जाहिर किया गया है। गवर्नर ने कहा है कि पूरे साल का अनुमान नए बेस ईयर के आंकड़े आने के बाद अप्रैल की पॉलिसी में जारी किया जाएगा।
महंगाई के मोर्चे पर RBI का आकलन है कि फिलहाल हालात काबू में हैं। चालू वित्त वर्ष (2025-26) के लिए औसत खुदरा महंगाई दर 2.1% रहने का अनुमान है, जबकि जनवरी-मार्च तिमाही में यह बढ़कर करीब 3.2% हो सकती है। अगले वित्त वर्ष यानी 2026-27 की पहली तिमाही में महंगाई दर 4.0% और दूसरी तिमाही में 4.2% रहने का अनुमान भी जाहिर किया गया है। RBI ने साफ किया है कि महंगाई दर में मामूली बढ़ोतरी की बड़ी वजह सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं के दाम हैं, जबकि कोर महंगाई अभी भी नियंत्रण में है।
स्टेबल मनी के को-फाउंडर और CEO सौरभ जैन ने कहा कि रेपो रेट में बदलाव न किया जाना निवेशकों के लिए स्टेबिलिटी देने वाला फैसला है। उनका कहना है कि रेपो रेट का असर फिक्स डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों तक पहुंचने में थोड़ा वक्त लगता है। मौजूदा हालात में फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने वालों के पास 7.75% या 7.5% जैसी दरों पर पैसे लॉक करने के कुछ मौके अब भी बने हुए हैं।