दिलचस्‍प है बीजेपी को नूह दंगे के आरोपी बिट्टू बजरंगी का ‘बाहरी समर्थन’

बिट्टू बजरंगी बीजेपी के कार्यक्रमों में अक्सर शामिल होता रहा है, लेकिन उसे कभी कोई पद नहीं मिल पाया. नूंह हिंसा के आरोपी के तौर पर कुख्यात बिट्टू बजरंगी को बजरंग दल कार्यकर्ता मोनू मानेसर का सहयोगी माना जाता है.

हालांकि, नूंह हिंसा के नाम आने पर विश्व हिंदू परिषद ने सोशल मीडिया के जरिये बताया था कि बिट्टू बजरंगी से उसका कोई संबंधन नहीं है. 

बिट्टू बजरंगी हाल फिलहाल हरियाणा चुनाव बीजेपी उम्मीदवार को सपोर्ट करने के लिए चर्चा में है – और यही बात हर किसी का ध्यान खींच रही है. असल में, बिट्टू बजरंगी का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है. 

हैरान करने वाली बात ये है कि बिट्टू बजरंगी बीजेपी उम्मीदवार का उसी विधानसभा सीट पर सपोर्ट कर रहा है, जहां से वो खुद भी कैंडिडेट है. फरीदाबाद की एनआईटी विधानसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार सतीश फागना चुनाव लड़ रहे हैं, और बिट्टू बजरंगी भी उनका सपोर्ट कर रहा है.

एनआईटी विधानसभा क्षेत्र में योगी आदित्यनाथ के चुनाव कैंपेन के दौरान बिट्टू बजरंगी को मंच पर देखा गया. वो स्टेज पर लोगों को धक्का देते हुए आगे पहुंच जाता है – और वहीं से ऐलान करता है कि वो बीजेपी उम्मीदवार को समर्थन देगा.

सतीश फागना का कहना है कि बिट्टू ने योगी जी के सामने अपना स्टैंड साफ किया है कि वो मुझे जिताने में मदद करेंगे. वो सनातन धर्म के नेता हैं.

जब बीजेपी नेताओं को बिट्टू बजरंगी के आपराधिक रिकॉर्ड की तरफ ध्यान दिलाया जाता है, तो वे उसके बचाव में उतर आते हैं. 

ये पूछा जाने पर कि क्या बिट्टू बजरंगी की वजह से बीजेपी को चुनाव में कोई दिक्कत नहीं हो सकती, बीजेपी नेता कहते हैं, बिट्टू बजरंगी कोई अपराधी नहीं है. कहते हैं, बिट्टू बजरंगी पर हत्या या यौन उत्पीड़न जैसे आरोप नहीं लगे हैं. उसे फंसाया गया है, क्योंकि वो गौरक्षक है. वो हमेशा भारत माता और गाय की रक्षा के लिए खड़ा रहा है.

हो सकता है, बिट्टू बजरंगी ने भी बीजेपी का टिकट हासिल करने का प्रयास किया हो, लेकिन असफल रहा हो. हो सकता है, किसी ने उसे निर्दल ही चुनाव लड़ने का आइडिया दिया हो, ताकि नये सिरे से चर्चा में आ सके. 
बीजेपी नेता भले ही बिट्टू बजरंगी का बचाव कर रहे हों, लेकिन अभी तक तो उसकी छवि नूंह हिंसा के आरोपी की ही रही है – लेकिन योगी आदित्यनाथ मंच पर उसका पहुंच जाना ये तो बता ही रहा है कि बीजेपी का उसे सपोर्ट हासिल है, भले ही उसे टिकट न मिला हो, या बीजेपी में वो कोई पद नहीं पा सका हो. 

बिट्टू बजरंगी का कहना है कि उसे किसी का भी समर्थन करने का अधिकार है. कहता है, मैंने बीजेपी का सपोर्ट किया है, मैं जीतने में भी मदद करूंगा. मेरी इच्छा है… मैं जिसे चाहूं उसके लिए प्रचार करूं.

सही बात है, लेकिन फिर उसने नामांकन क्यों दाखिल किया था. क्या नामांकन दाखिल करने के बाद उसका मन बदल गया.
क्या इस यू टर्न के पीछे कोई दबाव या लालच भी हो सकता है? 

बीजेपी नेताओं का दावा है कि वो अपनी तरफ से पार्टी उम्मीदवार का सपोर्ट कर रहा है, किसी ने उसे ऐसा करने के लिए कहा नहीं है. 

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