“जशपुर में सोलर टनल ड्रायर की शुरुआत: महुआ और वनौषधियों के वैज्ञानिक प्रसंस्करण को मिली नई पहचान”


सोलर टनल ड्रायर


📰 आर्टिकल (400+ शब्द):

छत्तीसगढ़ में स्थानीय संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार जहां वन-आधारित आजीविका को सशक्त बनाने पर जोर दे रही है, वहीं जशपुर जिला महुआ और वनोपज के मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

जशपुर जिले में अब DST (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग) प्रायोजित परियोजना के तहत सोलर टनल ड्रायर की स्थापना की गई है, जिससे खाद्य-ग्रेड महुआ फूल और वनौषधियों के वैज्ञानिक प्रसंस्करण को नई दिशा मिली है।


🌸 महुआ मूल्य संवर्धन में जशपुर की पहचान

जशपुर जिला पहले ही महुआ नेक्टर, महुआ च्यवनप्राश, लड्डू, कुकीज़ जैसे पोषक और पारंपरिक खाद्य उत्पादों के विकास के लिए जाना जा रहा है। लेकिन पूरी मूल्य श्रृंखला में सुरक्षित संग्रहण और निर्जलीकरण एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी, क्योंकि पारंपरिक खुले वातावरण में सुखाने से गुणवत्ता प्रभावित होती थी।


🔬 DST परियोजना से मिला समाधान

इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा स्वीकृत परियोजना
“Technological Augmentation of Indigenous Practices of ST Communities of Chhattisgarh for Sustainable Livelihood and Entrepreneurial Development”
को जशपुर जिले में लागू किया जा रहा है।

यह परियोजना DST द्वारा वैज्ञानिक डॉ. प्रसन्ना कुमार जीवी को स्वीकृत की गई है और इसे स्थानीय सहभागिता के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है।


☀️ सोलर टनल ड्रायर की खासियत

परियोजना के अंतर्गत NIFTEM, कुंडली से जुड़े वैज्ञानिक डॉ. प्रसन्ना कुमार जीवी द्वारा जशपुर में सोलर टनल ड्रायर स्थापित किया गया। इस पहल में जय जंगल फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का सक्रिय सहयोग रहा।

फूड प्रोसेसिंग कंसल्टेंट एवं युवा वैज्ञानिक समर्थ जैन ने बताया कि पारंपरिक सुखाने की प्रक्रिया में:

  • धूल और नमी से गुणवत्ता खराब होती है
  • कीटों के कारण खाद्य सुरक्षा प्रभावित होती है
  • बाज़ार में उत्पाद की स्वीकार्यता घट जाती है

इन समस्याओं को दूर करने के लिए नियंत्रित और स्वच्छ निर्जलीकरण प्रणाली की आवश्यकता थी।


🌿 गुणवत्ता, पोषण और पर्यावरण—तीनों का संरक्षण

स्थापित सोलर टनल ड्रायर के माध्यम से:

  • नियंत्रित तापमान में तेज़ और समान सुखाना
  • महुआ की गुणवत्ता, रंग, सुगंध और पोषक तत्व सुरक्षित
  • दीर्घकालीन भंडारण संभव
  • वर्षा, धूल और कीटों से सुरक्षा
  • पूरी तरह सौर ऊर्जा आधारित और पर्यावरण-अनुकूल प्रणाली

जैसे लाभ मिल रहे हैं।


👩‍🌾 आदिवासी महिलाओं को मिला वैज्ञानिक प्रशिक्षण

परियोजना के तहत महुआ के साथ-साथ वनौषधियों के निर्जलीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया। आदिवासी महिला लाभार्थियों को:

  • गिलोय
  • अडूसा
  • पालक जैसी मौसमी सब्ज़ियों

के वैज्ञानिक और स्वच्छ निर्जलीकरण का व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं लाइव डेमोंस्ट्रेशन दिया गया।

प्रशिक्षण में विशेष रूप से:

  • सुरक्षित हैंडलिंग
  • ट्रे लोडिंग
  • नमी नियंत्रण
  • वैज्ञानिक भंडारण विधियों

पर जोर दिया गया।


🌱 टिकाऊ आजीविका की ओर मजबूत कदम

उल्लेखनीय है कि डॉ. प्रसन्ना कुमार जीवी पिछले तीन वर्षों से जशपुर जिले में निरंतर कार्य कर रहे हैं। उनकी दीर्घकालिक सहभागिता से यह परियोजना स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित, व्यावहारिक और टिकाऊ मॉडल के रूप में विकसित हो रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *