कानपुर में कालिंदी एक्सप्रेस को दहलाने की साजिश में अब शाहरुख नाम के एक हिस्ट्रीशीटर की तलाश की जा रही है. जानकारी के मुताबिक दो महीने पहले वह मुंडेरी गांव में रह रहा था और यहीं का रहने वाला था. घटना के दिन उसे गांव में देखा गया था और उसके बाद से ही वह गायब है. उसकी तलाश की जा रही है.
मामले की जांच कर रही एटीएस ने अब तक चार लोगों को लखनऊ से हिरासत में लिया है और पूछताछ कर रही है. इसके साथ ही जांच एजेंसी एनआईए भी कानपुर के अलावा लखनऊ, कन्नौज समेत कई जिलों में संदिग्धों से पूछताछ कर रही है.
जांच में यह भी सामने आया है कि सिलेंडर का प्रयोग करके पेट्रोल और बारूद की मदद से पूरी ट्रेन में आग लगाने की मंशा हो सकती है. हादसे वाले स्थान से कुछ दूरी पर एक ढाबा भी है. यह हादसा हाइवे से लगा हुआ है.
इस ढाबे पर डॉग स्क्वायड की टीम भी गई थी. खोजी कुत्ता भी वहां गया था. जिससे अंदेश हुआ कि कुछ संदिग्ध वहां गए होंगे. मामले में ढाबे वाले से भी पूछताछ की कई है. घटना के दिन कौन-कौन लोग आए थे? क्या कोई संदिग्ध था जिसने साथ में कोई भारी सामान लिया हुआ था, इसकी भी जांच की जा रही है.
कानपुर में रविवार को कालिंदी एक्सप्रेस ट्रेन को पटरी से उतारने की साजिश के पीछे यूपी एटीएस (आतंकवाद निरोधी दस्ते) ने आतंकी संगठन खुरासान मॉड्यूल का हाथ होने का संदेह जाताया है. सूत्रों की मानें तो एटीएस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि इसके पीछे आईएस के खुरासान मॉड्यूल का हाथ हो सकता है.
इस मॉड्यूल के लड़के खुद को कट्टरपंथी बनाकर वुल्फ अटैक करते हैं. इस तरह के हमले 2017 में मध्य प्रदेश की ट्रेनों में हुए थे. इसके बाद तेलंगाना एटीएस की खुफिया सूचना के आधार पर यूपी एटीएस ने लखनऊ में एक मुठभेड़ में मॉड्यूल के सदस्य सैफुल्लाह को मार गिराया था.
सैफुल्लाह के पास से सिलेंडर बम और आईईडी आदि बनाने का सामान मिला था. इस मामले में कानपुर के जाजमऊ इलाके से कई लड़कों को गिरफ्तार किया गया था. ऐसे में अधिकारियों को शक है कि आईएस और आईएसआई के इशारे पर ट्रेनों में लोन वुल्फ अटैक किए जा सकते हैं. एनटीएस ने यह भी संदेह जताया है कि कट्टरपंथियों के साथ-साथ पैसे के लिए हमला करने वाले लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं. हालांकि, पूरे मामले की जांच की जा रही है.