ईरान ने एक साथ 400 मिसाइलें दागते हुए आठ देशों को निशाना बनाया, जिससे मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ गया है। हमले में कुवैत, बहरीन, यूएई और सऊदी अरब समेत कई देशों के सैन्य ठिकाने टारगेट हुए हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उन्होंने सभी इज़राइली और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, और यह कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक “दुश्मन पूरी तरह से हार नहीं जाता।”
कुवैत पर हमला और सुरक्षा का दावा
कुवैत ने ईरानी हमलों के बाद अपनी रक्षा का अधिकार सुरक्षित रखने की घोषणा की। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान की मिसाइलों के हमले के बाद देश को अपनी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाने का अधिकार है। कुवैती अधिकारियों ने पुष्टि की कि हमले अली अल-सलेम बेस और अबू धाबी के अल धाफरा बेस पर हुए थे।
बहरीन में अमेरिकी बेस पर हमला
बहरीन में यूएस फिफ्थ फ्लीट के नेवल बेस पर मिसाइलों से हमला किया गया, जिसके बाद वहां घने धुएं की परत देखी गई। यह हमला ईरानी मिसाइलों से हुआ, जिसे यूएस और इज़राइल की मिलिट्री कार्रवाई के बाद प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। बहरीन के अधिकारियों ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिकी नेवी के मुख्यालय को निशाना बनाया गया था।
ईरान के धमकी भरे बयान
ईरान ने अपने बयान में कहा कि इज़राइल और अमेरिका के खिलाफ उनके हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक इन देशों के सैन्य ठिकानों को पूरी तरह से समाप्त नहीं किया जाता। ब्रिगेडियर जनरल अबोलफजल शेखरची ने कहा कि ईरानी सेना किसी भी इज़राइली मदद को स्वीकार करने वाले बेस को निशाना बनाएगी और हमले में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई जाएगी। ईरान ने पहले ही वादा किया था कि ईरान के शहरों पर हमलों के जवाब में इज़राइल और अमेरिका को ‘ऐतिहासिक सबक’ दिया जाएगा।
यूएई पर मिसाइल हमला और रक्षा की प्रतिक्रिया
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों ने शुक्रवार को खुलेआम हमला किया। हालांकि, यूएई ने अपनी एयर डिफेंस सिस्टम की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि उसने कई मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया। यूएई के अधिकारियों ने यह भी कहा कि उनका एयर डिफेंस सिस्टम इस प्रकार के हमलों से निपटने में सक्षम है और भविष्य में भी किसी भी तरह के हमलों का सशक्त जवाब दिया जाएगा।
वैश्विक प्रतिक्रिया और स्थिति
मध्य-पूर्व में हुए इस हमले ने वैश्विक समुदाय को फिर से ईरान के सैन्य हमलों की गंभीरता पर विचार करने के लिए मजबूर किया है। अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते सहयोग और ईरान के खिलाफ सैन्य दबाव के चलते इस घटना को राजनीतिक और सैन्य दृष्टि से अहम माना जा रहा है। उधर, यूएई और कुवैत जैसी देशों ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं, और युद्ध की स्थिति में अपनी रक्षा का अधिकार सुरक्षित रखा है।