एक स्वस्थ रिश्ते की नींव आपसी समझ और सम्मान पर टिकी होती है लेकिन अनजाने में हमारी कुछ आदतें पार्टनर के लिए घुटन बन सकती हैं। अगर आपके रिश्ते में बार-बार झगड़े हो रहे हैं तो दूसरों को दोष देने से पहले आत्म-मंथन जरूरी है।
रिश्ते में असहमति होना सामान्य है लेकिन क्या आप हमेशा अपनी बात मनवाने की कोशिश करते हैं। अगर आप हर बहस को एक मुकाबला समझते हैं जिसे आपको जीतना ही है तो यह टॉक्सिसिटी का पहला संकेत है। एक अच्छे पार्टनर की निशानी यह है कि वह सही होने के बजाय रिश्ते को प्राथमिकता दे। यदि आप पार्टनर की दलीलों को अनसुना कर देते हैं तो यह उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचा सकता है।
आजादी को कर रहे हैं कंट्रोल
प्यार और अधिकार जताने के बीच एक बहुत बारीक रेखा होती है। क्या आप अपने पार्टनर के दोस्तों, उनके पहनावे या उनके फोन चेक करने की कोशिश करते हैं। अगर जवाब हां है तो आप अनजाने में उन्हें कंट्रोल कर रहे हैं। एक टॉक्सिक पार्टनर अक्सर असुरक्षा की भावना के कारण दूसरे व्यक्ति की निजी आजादी छीनने लगता है जिससे रिश्ते में विश्वास खत्म होने लगता है।
गलती होने पर क्या आप माफी मांगते हैं?
अहंकार (Ego) अच्छे-भले रिश्तों को दीमक की तरह चाट जाता है। खुद से पूछें कि पिछली बार आपने अपनी गलती कब मानी थी। अगर आप अपनी हर गलती के पीछे पार्टनर का ही कोई कारण ढूंढ लेते हैं या गिल्ट ट्रिप का सहारा लेते हैं तो यह व्यवहार टॉक्सिक है। अपनी गलतियों की जिम्मेदारी लेना और ईमानदारी से माफी मांगना एक परिपक्व पार्टनर की पहचान है।
खुशियों में शामिल
जब आपके पार्टनर को कोई उपलब्धि हासिल होती है तो क्या आप वाकई खुश होते हैं या जलन महसूस करते हैं। टॉक्सिक पार्टनर अक्सर अपने साथी की सफलता को खुद के लिए खतरा मानने लगते हैं या उसे कमतर दिखाने की कोशिश करते हैं। एक हेल्दी रिलेशनशिप वह है जहां दोनों एक-दूसरे के सबसे बड़े चीयरलीडर हों।
सुधार की गुंजाइश
अगर इन सवालों के जवाब आपको असहज कर रहे हैं तो परेशान न हों। अपनी कमियों को पहचानना ही सुधार की ओर पहला कदम है। एक टॉक्सिक व्यवहार को बदला जा सकता है बशर्ते आप अपने पार्टनर की भावनाओं का सम्मान करने और अपने व्यवहार पर काम करने के लिए तैयार हों। संवाद ही हर उलझन का सबसे बड़ा हल है।