एक साल पहले सऊदी अरब इजरायल को सामान्यीकरण समझौते के तहत मान्यता देने की तैयारी कर रहा था. माना जा रहा था कि इससे मध्य-पूर्व की स्थिति में मूलभूत परिवर्तन होगा और ईरान और उसके सहयोगी अलग-थलग हो जाएंगे. ऐसा कहा जा रहा था कि सऊदी अरब अगर इजरायल के साथ सामान्यीकरण समझौता करता है तो फिलिस्तीन के निर्माण में कोई प्रगति नहीं होगी बल्कि यह मुद्दा कहीं पीछे छूट जाएगा. लेकिन इजरायल-हमास शुरू होने और अब हमास नेता याह्या सिनवार की हत्या के बाद इजरायल-सऊदी सामान्यीकरण समझौता ठंडे बस्ते में चला गया है. अब इजरायल के बजाए सऊदी अरब अपने पारंपरिक कट्टर दुश्मन ईरान के साथ संबंधों को बेहतर बना रहा है.
सऊदी अरब साथ ही इस बात पर अब जोर दे रहा है कि जब तक इजरायल फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता नहीं देता, उसके साथ कोई कूटनीतिक समझौता नहीं होगा. सऊदी अरब के रुख में यह बदलाव बेहद अहम माना जा रहा है.
मध्यपूर्व में कूटनीतिक तनाव कम करने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन यह वैसा नहीं है जैसा कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोचा था. वो लगातार कहते हैं कि उनका प्रशासन सऊदी के साथ समझौता कर सकता है. लेकिन चीजें उनके कहे मुताबिक नहीं हो रही हैं बल्कि क्षेत्र के देशों के साथ ईरान के संबंध मजबूत हो रहे हैं.
इस महीने, खाड़ी देशों के विदेश मंत्रियों के साथ ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने मुलाकात की थी. इस मुलाकात में खाड़ी देशों ने ईरान को यह आश्वासन दिया कि इजरायल के साथ उसके युद्ध में वो तटस्थ रहेंगे. यह मुलाकात सदियों से चली आ रही सांप्रदायिक दुश्मनी को कम करने का काम करेगा.
इसके बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने तनाव कम करने की कोशिश में इराक और ओमान सहित क्षेत्र के अन्य देशों की यात्रा करने से पहले सऊदी अरब का दौरा किया. मिस्र और तुर्की की यात्रा करने से पहले उन्होंने जॉर्डन का भी दौरा किया. ईरानी समाचार मीडिया के अनुसार, किसी ईरानी विदेश मंत्री ने 12 सालों में मिस्र का दौरा किया था.
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जहां फिलिस्तीनी राज्य के निर्माण की बात को अस्वीकार करते हैं वहीं, सऊदी अधिकारी अपने भाषणों और मीडिया में दिए अपने इंटरव्यू में टू स्टेट सॉल्यूशन की बात कर रहे हैं. अरब दुनिया के नेता माने जाने वाले सऊदी अरब का कहना है कि फिलिस्तीन के लिए एक अलग राज्य ही एकमात्र तरीका है जिससे इजरायल सऊदी अरब के साथ संबंध सामान्य कर सकता है.
गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद इजरायल ने वहां मदद पहुंचने से रोक दिया. युद्ध में हजारों की संख्या में लोग मारे गए जिनमें अधिक संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल थे. इन सबकी वजह से सऊदी नेतृत्व के लिए फिलिस्तीनी राज्य के मुद्दे को नजरअंदाज करना असंभव हो गया.
सऊदी अरब के बिजनेसमैन और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट नियोम के सलाहकार बोर्ड के सदस्य अली शिहाबी कहते हैं, ‘गाजा में जो हो रहा है, उससे क्षेत्र में इजरायल के सामान्यीकरण समझौतों को धक्का लगा है. सऊदी अरब देख रहा है कि गाजा की स्थिति ऐसी है जिससे इजरायल के साथ कोई भी संबंध स्थापित करना ठीक नहीं है. अब जब तक कि इजरायली अपना रुख नहीं बदलते और फिलिस्तीनी राज्य के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता नहीं दिखाते, सऊदी इजरायल के साथ अपने संबंधों को सामान्य नहीं करेगा.’
फिलहाल, सऊदी अरब और उसके खाड़ी सहयोगी ईरान के कूटनीतिक प्रयासों की ईमानदारी को लेकर संशय में हैं. जबकि ईरान के दो सहयोगी, हमास और हिजबुल्लाह पर इजरायल ने बुरी तरह से हमला किया है, ईरान अभी भी अपने तीसरे सहयोगी, यमन में हूती विद्रोहियों को हथियार और समर्थन दे रहा है. हूती विद्रोही सऊदी अरब पर भी हमला करते रहे हैं.
शिहाबी कहते हैं, ‘लेकिन जब तक ईरानी सऊदी अरब तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाते रहेंगे, सऊदी नेतृत्व इसे स्वीकार करता रहेगा. अगर ईरान गंभीर है, तो आने वाले समय में मध्यपूर्व का वास्तविक पुनर्गठन होगा.’
अली शिबाही जैसे महल के अंदरूनी लोग मानते हैं कि सऊदी अरब में लोकतंत्र नहीं है. हालांकि, सऊदी क्राउन प्रिंस जनता की राय के प्रति संवेदनशील हैं. सऊदी अरब की जनता पिछले एक साल इजरायल के खिलाफ और सख्त हो गई है.
खाड़ी क्षेत्र में दुनिया की सबसे युवा आबादी है. 2022 में सऊदी लोगों की औसत आयु 29 वर्ष थी. सऊदी अरब के बहुत से नागरिक सोशल मीडिया पर गाजा से आ रही भयावह तस्वीरों को लेकर स्तब्ध हैं और वो सोशल मीडिया पर इजरायल के खिलाफ लिख भी रहे हैं. इसे देखते हुए इजरायल के साथ सामान्यीकरण समझौते को लेकर सऊदी अरब का रुख बदल रहा है.
सऊदी क्राउन प्रिंस ने हाल ही में दिए अपने सार्वजनिक भाषण में फिलिस्तीनी राज्य की वकालत की थी.
18 सितंबर को क्राउन प्रिंस ने अपने वरिष्ठ सलाहकार परिषद को संबोधित करते हुए कहा था, ‘सऊदी अरब स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना, जिसकी राजधानी पूर्वी येरुशलम हो, की स्थापनी के लिए अपने अथक प्रयासों को बंद नहीं करेगा. हम पुष्टि करते हैं कि सऊदी इसके बिना इजरायल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित नहीं करेगा.’