देश के आईटी सेक्टर पर एआई के बढ़ते प्रभाव और वैश्विक अनिश्चितता का असर साफ दिखाई देने लगा है। लगातार दूसरे दिन बड़ी आईटी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे पूरे शेयर बाजार में नकारात्मक माहौल बना रहा।
शुक्रवार को बाजार बंद होने तक बीएसई सेंसेक्स 1,048 अंक यानी 1.25 प्रतिशत गिरकर 82,627 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 336 अंक टूटकर 25,471 अंक पर आ गया। इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी और बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा।
मिडकैप और स्मॉलकैप भी दबाव में
केवल बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी गिरावट देखी गई। बीएसई मिडकैप इंडेक्स 779 अंक यानी 1.7 प्रतिशत की गिरावट के साथ 45,705 अंक पर बंद हुआ, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 790 अंक गिरकर 49,279 अंक पर पहुंच गया।
निवेशकों को भारी नुकसान
बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग 7 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। अचानक आई मंदी से छोटे निवेशकों के साथ-साथ बड़े निवेशकों को भी बड़ा झटका लगा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी वजह
बाजार में गिरावट का मुख्य कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी बिकवाली को माना जा रहा है। शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने करीब 7,395 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 5,554 करोड़ रुपये का निवेश कर बाजार को कुछ हद तक संभालने की कोशिश की। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों और तकनीकी क्षेत्र के रुझानों पर बाजार की दिशा निर्भर करेगी।