रायपुर यूनिवर्सिटी हॉस्टल में पीलिया का कहर! दूषित पानी से 12 छात्राएं बीमार, 2 AIIMS में भर्ती

रायपुर पीलिया


छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक बड़ा स्वास्थ्य संकट सामने आया है। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के नवीन कन्या छात्रावास में दूषित पानी पीने से 12 से अधिक छात्राएं पीलिया (जॉन्डिस) की चपेट में आ गई हैं। दो छात्राओं की हालत गंभीर होने पर उन्हें एम्स रायपुर में भर्ती कराया गया है।

इस घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रावास प्रबंधन की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


कैसे फैला संक्रमण?

जानकारी के अनुसार मूल विज्ञान केंद्र की कई छात्राएं पिछले कुछ दिनों से इन लक्षणों से परेशान थीं:

  • लगातार उल्टी
  • तेज कमजोरी
  • आंख और त्वचा में पीलापन
  • भूख में कमी

जांच के बाद पीलिया संक्रमण की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने दूषित पानी को संभावित कारण बताया है।


छात्राओं के गंभीर आरोप

छात्राओं का कहना है कि:

  • लंबे समय से पेयजल की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की जा रही थी
  • पानी में बदबू और रंग बदलने की समस्या पहले भी थी
  • वाटर कूलरों की नियमित सफाई नहीं हो रही थी
  • पानी की लैब जांच समय पर नहीं कराई गई

छात्राओं का आरोप है कि प्रबंधन ने इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया, जिसका नतीजा अब सबके सामने है।


2 छात्राएं AIIMS में भर्ती

जब दो छात्राओं की हालत बिगड़ी तो उन्हें तुरंत एम्स रायपुर में भर्ती कराया गया।

  • डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी
  • अन्य संक्रमित छात्राओं का भी उपचार शुरू
  • हॉस्टल में स्वास्थ्य टीम द्वारा जांच

संक्रमण फैलने की आशंका के चलते कई छात्राएं फिलहाल अपने घर लौट गई हैं।


छात्र संगठन की मांग

छात्र संगठन एनएसयूआई ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

उनकी मुख्य मांगें:

  • पेयजल की तत्काल लैब जांच
  • जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई
  • छात्रावास में स्वच्छता की नियमित निगरानी
  • भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए स्थायी समाधान

स्वास्थ्य विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार पीलिया आमतौर पर दूषित पानी या संक्रमित भोजन से फैलता है।

बचाव के लिए जरूरी है:

  • उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पीना
  • पानी के स्रोत की नियमित जांच
  • साफ-सफाई का विशेष ध्यान
  • शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

यह घटना न सिर्फ छात्रावास प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं की निगरानी कितनी जरूरी है।

रायपुर में हुई यह घटना अभिभावकों और छात्रों के लिए चिंता का विषय बन गई है। यदि समय रहते पानी की गुणवत्ता की जांच और सफाई की जाती, तो शायद यह स्थिति टाली जा सकती थी।

अब सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी? क्या छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी?

फिलहाल सबसे जरूरी है संक्रमित छात्राओं का बेहतर इलाज और हॉस्टल में स्वच्छ पेयजल की तत्काल व्यवस्था।

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