झरिया एल्कलाइन वाटर प्लांट
रायपुर: छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नई पहल सामने आई है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में परिवर्तन की दिशा दिखा रही है। ‘झरिया एल्कलाइन वाटर प्लांट’ ने केवल पानी का उत्पादन नहीं किया, बल्कि महिलाओं के रोजगार और उद्यमिता के एक नए मॉडल को स्थापित किया है।
यह प्रोजेक्ट बिहान समूह द्वारा संचालित है, और इसे रायपुर जिले के ग्राम पचेड़ा में स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में और नया रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRDA) के सहयोग से इस प्लांट की स्थापना की गई थी। इस प्लांट ने महज एक साल में 35 लाख रुपये का टर्नओवर हासिल किया और 15 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान किया, जिनमें अधिकांश महिलाएं हैं।
जल आपूर्ति और उत्पादन की क्षमता
- दैनिक उत्पादन: प्लांट में प्रतिदिन लगभग 5,000 कांच की बोतलें, 10,000 प्लास्टिक बोतलें, 1,000 जरीकेन, और 500 ठंडे जरीकेन पानी का उत्पादन होता है।
- उत्कृष्ट शुद्धता: यहां दो अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं हैं, जहां पानी की शुद्धता और पीएच स्तर की नियमित जांच की जाती है (8 से 8.5 पीएच)।
- पैकेजिंग: पानी को 200 एमएल से 1 लीटर तक की बोतलें और 20 लीटर के जरीकेन में पैक किया जाता है।
प्रमुख संस्थानों में आपूर्ति
‘झरिया’ ब्रांड का एल्कलाइन पानी अब मंत्रालय, जंगल सफारी, आईआईएम, नगर निगम रायपुर, जीएसटी कार्यालय, आईआईटी, एनआरडीए, पर्यावास भवन, और कलेक्ट्रेट जैसे प्रमुख संस्थानों में नियमित रूप से आपूर्ति किया जा रहा है। इसके अलावा, राज्योत्सव-2025, खेलो इंडिया, और कुंवरगढ़ महोत्सव जैसे बड़े आयोजनों में भी इस पानी की आपूर्ति की गई है।
महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन
इस प्लांट से जुड़ी महिलाओं को 15,000 रुपये तक का मासिक मानदेय मिल रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। इसके अलावा, बड़े आयोजनों के दौरान आस-पास की महिलाओं को अस्थायी रोजगार के अवसर भी मिलते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और सशक्त हो रही है।
‘लखपति दीदी’ योजना को प्रोत्साहन
‘झरिया’ एल्कलाइन वाटर प्लांट की यह पहल छत्तीसगढ़ की ‘लखपति दीदी’ योजना को भी मजबूती दे रही है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। यह पहल न केवल स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति करती है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन का एक बेहतरीन उदाहरण बन चुकी है।