सांस, दमा, अस्थमा, टीबी और सीओपीडी के मरीज सावधान हो जाएं। उनके लिए आने वाले दिन किसी आपातकाल (इमरजेंसी) से कम नहीं हैं। खराब हवा के कारण ब्रोंकाइटिस अटैक का खतरा है। हवा में धनतेरस से शुरू होने वाली आतिशबाजी का जहर और घुलेगा। इसका असर दीवाली के 10 दिनों बाद तक रह सकता है। हवा पहले ही खराब हो चुकी है जबकि अभी आतिशबाजी का दौर शुरू नहीं हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की साइट पर जारी आंकड़ों के अनुसार सोमवार की सुबह छह बजे लखनऊ के तालकटोरा क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 239 रहा। लखनऊ के ही केंद्रीय विद्यालय क्षेत्र में 200 एक्यूआई पाया गया। जबकि लालबाग में 102 एक्यूआई दर्ज किया गया। आगरा के मनोहरपुर में 121 एक्यूआई पाया गया। शास्त्री पुरम में 107 एक्यूआई दर्ज किया गया। बरेली में हवा की गुणवत्ता अपेक्षाकृत ठीक पाई गई है। यहां सिविल लाइंस क्षेत्र में सुबह छह बजे एक्यूआई 72 था। वहीं गोरखपुर एमएमएमयूटी क्षेत्र में 179 एक्यूआई दर्ज किया गया। कानपुर के आईआईटी क्षेत्र में 198 और किदवईनगर में 185 और नेहरूनगर में 78 एक्यूआई पाया गया। मेरठ के गंगानगर में 104, जयभीमनगर में 179, पल्लवपुरम में 161 एक्यूआई पाया गया। वहीं मुरादाबाद के बुद्धिनगर में 144 एक्यूआई पाया गया। जिगरा कॉलोनी में 108 एक्यूआई पाया गया। ट्रांसपोर्टनगर में 144 एक्यूआई पाया गया। प्रयागराज के झूसी में 73, मोतीलाल नेहरू एनआईटी क्षेत्र में 39 और नगर निगम क्षेत्र में 63 एक्यूआई पाया गया। वहीं वाराणसी के अदर्लीबाजार में 43, भेलूपुर में 47, बीएचयू क्षेत्र में 29 और मल्दहिया में 139 एक्यूआई पाया गया।
बता दें कि एक्यूआई के पैमाने पर 101 से 200 तक अच्छी स्थिति नहीं मानी जाती है। इस तरह के वातावरण में फेफड़ा, दिल और अस्थमा मरीजों को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। 201 से 300 तक खराब स्थिति मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने पर सांस की बीमारी का खतरा होता है। 401 से 500 तक एक्यूआई होने पर स्वस्थ आदमी पर भी असर पड़ सकता है। पहले से बीमार लोगों को ज्यादा खतरा होता है। वहीं एक्यूआई यदि 51 से 100 के बीच है तो इसे ठीक माना जाता है और यदि शून्य से 50 तक एक्यूआई है तो इसे अच्छी स्थिति माना जाता है।
हवा के प्रदूषण में वृद्धि का यह सिलसिला धनतेरस से शुरू होकर गोवर्धन पूजा तक चलेगा। इसके बाद भी दस दिनों तक इसका असर रहेगा। इन्हीं दिनों सांस संबंधी बीमारियों के पुराने मरीजों को सबसे ज्यादा खतरा है। हवा में शामिल रसायनों के सूक्ष्म कण जब सांस नली में होकर जाते हैं तो वहां घाव बना देते हैं। इससे सांस नली में सूजन आ जाती है। इसके बाद खांसी, सांस लेने में दिक्कत, घरघराहट शुरू हो जाती है। इसे ब्रोंकाइटिस कहा जाता है। वायरस और बैक्टीरियल संक्रमण के साथ यह खराब हवा से भी होता है। यहां ध्यान नहीं दिया गया तो सांस या अस्थमा का अटैक पड़ सकता है। इन्हीं दिनों पुराने मरीजों को हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का भी सबसे ज्यादा खतरा रहता है। इसलिए, खराब हवा के संपर्क में आने से जितना संभव हो बचने की जरूरत है।
ताजनगरी आगरा में व्यावसायिक इलाकों के साथ अब रिहायशी क्षेत्रों में भी प्रदूषण की जबर्दस्त मार शुरू हो गई है। दयालबाग और शास्त्रीपुरम जैसे इलाकों में भी सूक्ष्म, धूल, कार्बन, सल्फर की मौजूदगी का अधिकतम स्तर खतरनाक हो चला है। यहां सांस लेना दुश्वार हो रहा है। इस सीजन सबसे पहले व्यावसायिक इलाके संजय प्लेस की हवाएं खराब हुईं। इसके बाद सर्वाधिक ट्रैफिक वाले ताजगंज इलाके की हवाओं में जहर घुल गया। यह सिलसिला लगातार बढ़ता गया। अब शहर का कोई इलाका ऐसा नहीं है जहां हवाएं सांस लेने लायक रह गई हैं। सबसे ज्यादा ग्रीन कवर रखने वाला दयालबाग क्षेत्र रविवार को सर्वाधिक प्रदूषित रहा है। यहां पीएम 2.5 आकार के सूक्ष्म कणों की अधिकतम मौजूदगी का स्तर 322 माइक्रोग्राम पर मीटर तक पहुंच गया। यह प्रदूषण का सबसे खतरनाक पांचवां जोन है। इसे वेरी पुअर की श्रेणी में रखा जाता है। इसी तरह शास्त्रत्त्ीपुरम में पीएम 2.5 का स्तर 282 एमपीएम रिकार्ड किया गया। इन इलाकों में धूल कणों की मौजूदगी भी कृमश 154 और 186 एमपीएम रही है। शहर के शेष इलाके भी पुअर और वेरी पुअर श्रेणी के बीच झूल रहे हैं।
ग्वालियर रोड रोहता और व्यावसायिक स्थल संजय प्लेस में वाहनों की अधिक आवाजाही के कारण कार्बन मोनो आक्साइड की अधिकता है। रोहता में इसकी अधिकतम मौजूदगी का स्तर 62 और संजय प्लेस में 53 एमपीएम रिकार्ड किया गया है। जबकि इसका मानक 4.0 एमपीएम है। यानि कार्बन करीब 15 गुना अधिक पाया गया है।
घर से बाहर निकलने पर अब मास्क लगाना बेहद जरूरी हो गया है। अन्यथा सांस संबंधी दिक्कतें होने का खतरा है। घर में अगर साफ-सफाई हो रही है तब भी मास्क लगाने से बचाव हो पाएगा। एन-95 मास्क सबसे सही रहेगा। अगर यह उपलब्ध नहीं है तो थ्री लेयर का सर्जिकल मास्क जरूर लगाएं। कपड़ा, चुन्नी से बचाव नहीं होगा।