खदान हादसा
कोरबा में दर्दनाक खदान हादसा, एक की मौत, दो घायल
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित एसईसीएल की कुसमुंडा खदान में शुक्रवार को एक दर्दनाक खदान हादसा हो गया। खदान के भीतर काम के दौरान हाइड्रोलिक मशीन का सिलेंडर अचानक फट गया। इस भीषण विस्फोट में एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। हादसे के बाद खदान क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विस्फोट इतना तेज था कि आसपास काम कर रहे अन्य मजदूर सहम गए और कुछ देर के लिए काम पूरी तरह ठप हो गया।
🔧 कैसे हुआ हादसा?
मिली जानकारी के अनुसार:
- खदान के अंदर हाइड्रोलिक मशीन में मरम्मत और संचालन का कार्य चल रहा था
- मशीन में कुल छह मजदूर तैनात थे
- अचानक सिलेंडर में जोरदार विस्फोट हो गया
- एक मजदूर की मौके पर ही मौत
- दो मजदूर गंभीर रूप से घायल
घायलों को तत्काल खदान प्रबंधन द्वारा निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
👤 मृतक की पहचान: परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर की पहचान:
- नाम: संजय कुमार
- उम्र: 23 वर्ष
- निवासी: वाड्रफ नगर
संजय चार बहनों का इकलौता भाई था। उसकी असमय मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं गांव में भी शोक का माहौल है।
⚠️ सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
हादसे के बाद मजदूरों और परिजनों में भारी आक्रोश देखने को मिला। उनका आरोप है कि:
- नीलकंठ कंपनी द्वारा सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई
- मशीनों की नियमित जांच नहीं की जाती
- मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए
मजदूरों ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।
👮♂️ पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
दर्री सीएसपी विमल पाठक ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया:
- नीलकंठ कंपनी में कार्य के दौरान एक कर्मी की मौत हुई है
- मामले की जांच जारी है
- सभी पहलुओं की गंभीरता से पड़ताल की जा रही है
प्रशासन का कहना है कि जांच के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारों का खुलासा किया जाएगा।
🏭 खदानों में हादसे: बार-बार क्यों?
यह पहली बार नहीं है जब खदानों में इस तरह के हादसे हुए हों। विशेषज्ञों के अनुसार:
- पुरानी मशीनें और तकनीकी खामियां
- सुरक्षा नियमों का सही तरीके से पालन न होना
- ठेका कंपनियों पर निगरानी की कमी
- मजदूरों पर अधिक काम का दबाव
ये सभी कारण खदान हादसों की बड़ी वजह बनते जा रहे हैं।