नवरात्रि व्रत में एनर्जी बनाए रखने के लिए सही फलाहार, डायटीशियन से जानें टिप्स

नवरात्रि के नौ दिन काफी सारे लोग व्रत करते हैं। लेकिन इन दिनों व्रत की वजह से रोजमर्रा के काम प्रभावित ना हो और शरीर में एनर्जी बनी रहे। इसके लिए जरूरी है कि आपका फलाहार सही हो। ऐसे ही महिला के एक सवाल का जवाब दे रही हैं डायटीशियन कि व्रत के दौरान किस तरह का फलाहार खाकर दिनभर एनर्जी से भरपूर रहा जा सकता है।

⦁मैं इस साल नवरात्र के दौरान पूरे नौ दिन व्रत रखना चाहती हूं, लेकिन मैं चाहती हूं कि व्रत का नकारात्मक असर मेरे ऊर्जा के स्तर या दैनिक गतिविधियों पर बिल्कुल न पड़े। अपने फलाहार में मैं कौन-से खाद्य पदार्थों को ज्यादा मात्रा में शामिल करूं कि मेरी पोषण संबंधी सारी जरूरतें पूरी हो सकें।

– स्मिता चौधरी, पटना

नवरात्र के व्रत के दौरान सेहतमंद और हल्का खाना चाहिए, पर अधिकांश लोग इस दौरान तले-भुने खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट का अहम हिस्सा बना लेते हैं। इनमें पोषण कम और कैलोरी ज्यादा होती है। सबसे ज्यादा परेशानी की बात यह होती है कि इन खाद्य पदार्थों को पचा पाना हमारे पाचन तंत्र के लिए दूभर हो जाता है। सेहतमंद तरीके से व्रत करने के लिए यह जरूरी है कि आप इस दौरान सही खाद्य पदार्थों का चुनाव भी करें। अगर आप फलाहार के लिए सेहतमंद विकल्पों का चुनाव अपने लिए करेंगी, तो ऊर्जा के स्तर में भी कमी नहीं आएगी और आप व्रत में भी अपनी दैनिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभा पाएंगी। फलाहार के दौरान दिन भर में एक बार कुट्टू का आटा या सामक चावल जरूर खाएं। ये दोनों ही ग्लूटन फ्री होते हैं और आसानी से पच भी जाते हैं। कोशिश करें कि हर दिन कुट्टू के आटे की पूड़ियां बनाने की जगह उससे कम तेल वाली चीजें जैसे चीला आदि भी बनाएं। इस बात को समझें कि व्रत का मतलब नियमित अंतराल पर कुछ-न-कुछ खाना नहीं, बल्कि अपने पाचन तंत्र को आराम देना भी होता है। अगर सही तरीके से व्रत किया जाए, तो यह डिटॉक्स का सबसे बेहतरीत प्राकृतिक तरीका है। नवरात्र बदलते मौसम में आता है। यह बदलता मौसम शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता को कमजोर कर देता है। ऐसे में व्रत के दौरान प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों, मीट और नमक आदि से दूरी बरतना शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। साथ ही व्रत के दौरान ज्यादा मात्रा में फल और सात्विक भोजन का सेवन भी शरीर को भीतर से मजबूत बनाता है। व्रत के दौरान पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करना और नियमित अंतराल पर कुछ खाना भी जरूरी है ताकि शरीर में ग्लूकोज का सही स्तर बना रहे और ऊर्जा में कमी महसूस न हो।

⦁मैंने कुछ समय पहले अपना ब्लड टेस्ट करवाया था, जिसमें मेरा हीमोग्लोबिन 15 से ज्यादा आया था। डॉक्टर का कहना है कि इसका मतलब है कि मेरा खून गाढ़ा हो गया है, क्योंकि मैं पानी कम पी रही हूं। हीमोग्लोबिन ज्यादा होने का एक महिला की सेहत पर क्या असर पड़ता है और इसे सामान्य रेंज में लाने के लिए मुझे क्या करना चाहिए?

– केतकी दुबे, कानपुर

हीमोग्लोबिन के स्तर के बारे में जानकारी रखना अच्छी बात है। महिलाओं में यह स्तर 12 से 15 जीडीएल और पुरुषों में 14 से 17 जीडीएल माना जाता है। हीमोग्लोबिन के स्तर पर सेहत और उम्र आदि का भी असर पड़ता है। तय मानक से हीमोग्लोबिन का कम होना जहां एनीमिया की निशानी है, वहीं हीमोग्लोबिन का ज्यादा स्तर उच्च रक्तचाप और दिल की बीमारियों के खतरे को बढ़ा देता है। हीमोग्लोबिन का स्तर ज्यादा होने के कई कारण हो सकते हैं, पर इनमें से सबसे आम कारण है, शरीर में पानी की कमी। शरीर में पानी की कमी से खून गाढ़ा हो जाता है, जिसके कारण हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ जाता है। हर दिन ढाई से तीन लीटर पानी पीने की कोशिश करें। इस लक्ष्य को पाने के लिए सुबह उठने के बाद दो गिलास पानी पिएं। एक लीटर पानी दोपहर का खाना खाने से पहले पी लें। दोपहर के खाने के बाद रात में सोने से पहले कम-से-कम एक लीटर पानी और पिएं। हर दिन कम-से-कम पानी की इतनी मात्रा तो जरूर पिएं। इससे ज्यादा पानी अगर आप पी लेती हैं, तो उससे फायदा ही होगा।

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