छत्तीसगढ़ में मां-बेटी की हत्या: लिव-इन पार्टनर को मिली डबल उम्रकैद, सख्त संदेश”

छत्तीसगढ़ हत्या केस


कवर्धा, छत्तीसगढ़: कबीरधाम जिले के एक जघन्य हत्या कांड में अश्वनी पांडेय को अदालत ने दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई है। वसुंधरा वैष्णव और उनकी बेटी पार्वती वैष्णव की हत्या के मामले में शुक्रवार को अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिससे यह मामला छत्तीसगढ़ में सुर्खियों में आ गया। अपर सत्र न्यायाधीश गितेश कुमार कौशिक ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दो बार आजीवन कारावास की सजा दी और साथ ही धारा 201 के तहत 7 साल की कठोर सजा और 21 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

घटना का विवरण

यह दुखद घटना 2024 में कवर्धा के थाना क्षेत्र में घटी थी। वसुंधरा और उनकी बेटी पार्वती के शव संदिग्ध परिस्थितियों में एक मकान से बरामद हुए थे। घटनास्थल पर सामान बिखरा हुआ था, अलमारी के शीशे टूटे हुए थे और शवों के पास फिनाइल की गोलियां मिली थीं, जो शुरुआत में हत्या की आशंका को और मजबूत करती हैं।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और हत्या की पुष्टि

दोनों शवों को जिला अस्पताल भेजा गया, जहां पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से यह पुष्टि हुई कि उनकी मौत गला घोंटने से हुई थी। इसके अलावा, मृतकों के शरीर पर संघर्ष के निशान पाए गए, जिससे यह साफ हुआ कि उन्होंने हत्या से पहले विरोध किया था। यह खुलासा अपराध की गंभीरता को और अधिक बढ़ा देता है।

आरोपी का प्रेम संबंध और फरारी

जांच के दौरान यह पता चला कि आरोपी अश्वनी पांडेय और वसुंधरा लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। घटना के बाद आरोपी का अचानक गायब हो जाना संदेह को और मजबूत करता गया। पुलिस ने तकनीकी और साइबर सहायता से आरोपी की लोकेशन ट्रैक की और उसे रायपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक होटल से गिरफ्तार किया।

आरोपी ने साक्ष्य मिटाने की कोशिश की

आरोपी ने हत्या के बाद साक्ष्य को मिटाने की भी कोशिश की थी। घटनास्थल से ताला काटने के औजार, दस्तावेज और अन्य सामग्री बरामद की गई, जो मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य बने। इन साक्ष्यों को निर्णायक मानते हुए अदालत ने आरोपी को धारा 201 के तहत दोषी ठहराया।

अदालत का फैसला और न्याय का संदेश

अदालत ने इस अपराध को अत्यंत जघन्य माना, हालांकि इसे विरलतम श्रेणी में नहीं रखा, लेकिन आरोपी को सजा सुनाते हुए कहा कि यह अपराध समाज के लिए एक गंभीर संदेश है। अदालत ने यह भी कहा कि कठोर सजा से समाज में एक सख्त संदेश जाएगा कि ऐसे अपराधों में कानून से बचना संभव नहीं है।

न्यायिक प्रक्रिया और समाज को सख्त संदेश

यह फैसला 27 फरवरी 2024 से आरोपी की न्यायिक हिरासत को समायोजित करेगा, और इस पूरे मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी हुई। इस फैसले ने समाज को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि गंभीर अपराधों में दोषियों को कोई भी राहत नहीं मिलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *