लालकृष्ण आडवाणी ने राजेश खन्ना को दिया था ऐसा झटका, सदमे में थे काका; फिर यूं बदल गई कहानी

पूर्व उपप्रधानमंत्री और बीजेपी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन के मौके पर बधाइयों का तांता लगा है। आडवाणी अब 97 साल के हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बधाई देते हुए उनके लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना की। एलके आडवाणी को कुछ महीने पहले ही भारत रत्न से सम्मानित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, लालकृष्ण आडवाणी जी को जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। यह वर्ष बेहद खास है क्योंकि उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया है। देश को आगे बढ़ाने के लिए आडवाणी जी ने खुद को समर्पित कर दिया। मेरा सौभाग्य रहा कि लंबे समय तक हमें उनका मार्गदर्शन मिला।

लालकृष्णा आडवाणी बीजेपी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। यह भी कहा जा सकता है कि वह इस वक्त के बीजेपी के सबसे बुजुर्ग नेता हैं। लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेटी की जोड़ी ने लंबे समय तक राजनीति में पकड़ बनाए रखी। राम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व करके लालकृष्ण आडवाणी ने बीजेपी की दशा और दिशा बदल दी। वहीं नैतिकता को लेकर भी उनके कठिन फैसलों की तुलना आज भी नहीं है।

लालकृष्ण आडवाणी जनसंघ के अध्यक्ष रहे। इसके बाद वह राज्यसभा गए। वह भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे। देश के उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री के साथ अन्य मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। उनका जन्म 1927 में कराची में हुआ था। विभाजन के बाद वह परिवार के साथ भारत आ गए थे।

1991 के लोकसभा चुनाव में नई दिल्ली सीट पर सभी की नजर थी। इस सीट पर मुकाबला बीजेपी के लालकृष्ण आडवाणी और कांग्रेस उम्मीदवार अभिनेता राजेश खन्ना के बीच था। राजेश खन्ना की भी लोकप्रियता चरम पर थी। हालांकि राजनीति के मामले में राजेश खन्ना नौसिखिया ही नजर आ रहे थे। लेकिन नतीजे वाले दिन हालात बदलने लगे।

काउंटिंग सेंटर पर भीड़ लगी थी। सुबह 10 बजे के करीब जब रुझान आने लगे तो बीजेपी के कार्यकर्ता निराश हो गए। राजेश खन्ना आगे चल रहे थे। सातवें राउंड की गिनती तक आडवाणी पीछे ही रहे। ऐसे में सबने मान लिया है कि वह चुनाव हार जाएंगे। बीजेपी कार्यकर्ता अपने घर लौटने लगे। उधार कांग्रेस कार्यकर्ता ढोल-नगाड़े बजा रहे थे। मिठाइयां बंट रही थीं। फूल-मालाएं तैयार थीं। लेकिन सातवें राउंड के बाद बाजी पलटने लगी। एलके आडवाणी आगे हो गए।

बीजेपी के कार्यकर्ता काउंटिंग सेंटर पर फिल लौटने लगे और जश्न शुरू हो गया। अंत में ऐलान हुआ कि आडवाी डेढ़ हजार वोटों से जीत गए हैं। राजेश खन्ना इस हार को पचा नहीं पा रहे थे। ऐसे में उन्होंने कहा कि उनके साथ धोखा किया गया है। उन्होंने दोबारा काऊंटिंग की मांग कर दी। हालांकि ऐसा नहीं हुआ और फिर उन्होंने अंत में हार स्वीकार कर ली। कहा जाता है कि इस हार की वजह से वह कई दिनों तक लोगों से नहीं मिले।

एलके आडवाणी ने नई दिल्ली के साथ ही गुजरात की गांधीनगर सीट पर भी चुनाव लड़ा था और दोनों ही जगह जीत गए थे। बाद में उन्होंने नई दिल्ली सीट छोट दी। ऐसे में इस सीट पर उपचुनाव हुए। बीजेपी ने शत्रुघ्न सिन्हा को उतारा तो कांग्रेस ने फिर से राजेश खन्ना को उतार दिया। उपचुनाव में राजेश खन्ना जीत गए। वह चार साल लोकसभा के सदस्य रहे। 1996 में उन्हें बीजेपी के जगमोहन से हार का सामना करना पड़ा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *