ट्रेन हादसे में गंवाया पैर, IIT से पढ़ाई..

बैडमिंटन खिलाड़ी नितेश कुमार ने पेरिस पैरालंपिक में धांसू प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता. नितेश ने मेन्स सिंगल्स (SL3) वर्ग के फाइनल मुकाबले में ग्रेट ब्रिटेन के डेनिल बेथेल ने 21-14, 18-21, 23-21 से मात दी. नितेश पैरालंपिक में गोल्ड जीतने वाले दूसरे भारतीय बैडमिंटन प्लेयर हैं. टोक्यो में तीन साल पहले जब पैरा बैडमिंटन का डेब्यू हुआ था तो प्रमोद भगत ने इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता था. एसएल3 वर्ग के खिलाड़ियों के शरीर के निचले हिस्से में अधिक गंभीर विकार होता है और वह आधी चौड़ाई वाले कोर्ट पर खेलते हैं.

नितेश कुमार का जन्म 30 दिसंबर 1994 को राजस्थान के बास किरतन (चूरू जिले की राजगढ़ तहसील) में हुआ था. नितेश कुमार को 2009 में विशाखापत्तनम में एक रेल दुर्घटना के बाद हमेशा के लिए अपना बायां पैर गंवाना पड़ा. उस समय नितेश सिर्फ 15 वर्ष के थे. इस दुखद वाकये के बावजूद नितेश कुमार घबराए नहीं और उन्होंने अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रखा. उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) की प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए एक साल की छुट्टी ली.

उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 2013 में IIT मंडी में दाखिला प्राप्त किया. आईआईटी में पढ़ाई के दौरान ही उनकी बैडमिंटन के खेल में रुचि जगी और उन्होंने पैराएथलीट बनने का फैसला किया. नितेश कुमार ने साल 2016 में इंटरनेशनल लेवल पर डेब्यू किया और 2017 में आयरिश पैरा-बैडमिंटन इंटरनेशनल में अपना पहला खिताब जीता. उन्होंने 2019 में खेल और युवा मामलों के विभाग के लिए काम करना शुरू किया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग लेना जारी रखा. 30 वर्षीय नितेश ने विश्व चैम्पियनशिप में तीन पदक जीते हैं, जिसमें क्रमशः 2019, 2022 और 2024 में दो रजत और एक कांस्य शामिल हैं.

29 साल के नितेश कुमार ने एशियाई पैरा खेलों में भी चार पदक जीते हैं. जिसमें 2018 जकार्ता एशियाई पैरा खेलों में एक कांस्य पदक और 2022 हांगझोऊ एशियाई पैरा खेलों में तीन पदक (एक स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य) शामिल हैं. और अब उन्होंने सोमवार को अपने मेडल रिकॉर्ड में एक पैरालंपिक स्वर्ण पदक भी जोड़ लिया है.

देखा जाए तो पेरिस पैरालंपिक 2024 में भारत के मेडल की संख्या अब 9 हो गई है. भारत के खाते में अब तक दो गोल्ड, तीन सिल्वर और चार ब्रॉन्ज मेडल हैं. नितेश कुमार से पहले शूटर अवनि लेखरा ने पेरिस ओलंपिक में भारत को पहला गोल्ड दिलाया था.

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