छत्तीसगढ़ में पहली बार दिखी मल्लार्ड बत्तख! गिधवा टैंक बना प्रवासी पक्षियों का नया स्वर्ग

मल्लार्ड बत्तख


गिधवा टैंक में खास मेहमान की एंट्री

रायपुर के प्रसिद्ध पक्षी विहार क्षेत्र गिधवा टैंक में अक्टूबर 2025 में एक बेहद खास और आकर्षक प्रवासी पक्षी ने दस्तक दी। यह मेहमान है सुंदर और रंग-बिरंगी मल्लार्ड बत्तख। पहली बार इस विदेशी जलपक्षी का यहां आगमन दर्ज किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।

लंबी प्रवासी यात्रा तय कर आई यह बत्तख गिधवा टैंक के शांत, स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में आसानी से घुल-मिल गई। यहां का प्राकृतिक परिवेश और जैव-विविधता इसे रुकने के लिए अनुकूल माहौल प्रदान कर रहे हैं।


क्यों खास है मल्लार्ड बत्तख?

Mallard दुनिया की सबसे पहचान योग्य जंगली बत्तखों में से एक है।

इसकी प्रमुख विशेषताएं:

  • नर मल्लार्ड का चमकदार हरा सिर और सफेद कॉलर
  • मादा का भूरे रंग का आकर्षक शरीर
  • लंबी दूरी तक प्रवास करने की क्षमता
  • जलाशयों और आर्द्रभूमि में रहना पसंद करती है

भारत में मल्लार्ड का आगमन आमतौर पर उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में देखा जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसका दिखना दुर्लभ माना जा रहा है।


बढ़ी गिधवा टैंक की पहचान

गिधवा टैंक पहले से ही अपनी समृद्ध जैव-विविधता और प्रवासी पक्षियों के लिए जाना जाता है। मल्लार्ड बत्तख के आगमन से इसकी पहचान और भी मजबूत हुई है।

क्षेत्र की खास बातें:

  • सुरक्षित और शांत जलाशय
  • भरपूर प्राकृतिक भोजन
  • स्थानीय और प्रवासी पक्षियों का संगम
  • पक्षी प्रेमियों के लिए आदर्श स्थल

पक्षी प्रेमी और प्रकृति फोटोग्राफर इस दुर्लभ अतिथि को देखने और उसके व्यवहार का अध्ययन करने के लिए उत्साहित हैं।


संरक्षण प्रयासों की सफलता

मल्लार्ड का आगमन यह दर्शाता है कि राज्य में जलाशयों के संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयास सफल हो रहे हैं।

  • जल स्रोतों की नियमित सफाई
  • पर्यावरण जागरूकता अभियान
  • प्राकृतिक आवास का संरक्षण
  • स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भूमिका

इन प्रयासों के कारण गिधवा टैंक आज प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल बनता जा रहा है।


छत्तीसगढ़ की पारिस्थितिक पहचान मजबूत

मल्लार्ड बत्तख का यहां दिखना केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की पारिस्थितिक समृद्धि का प्रतीक है। यह बताता है कि यदि संरक्षण और संवर्धन के प्रयास निरंतर किए जाएं, तो प्रकृति सकारात्मक परिणाम देती है।

गिधवा टैंक अब सिर्फ एक स्थानीय जलाशय नहीं, बल्कि पक्षी प्रेमियों और पर्यावरण शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण आकर्षण बन चुका है।

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