ग्रेटर नोएडा वेस्ट रूट पर जल्द शुरू हो सकता है मेट्रो का काम, 17.5 KM रूट पर यहां बनेंगे 11 स्टेशन

नोएडा से ग्रेटर नोएडा वेस्ट रूट पर मेट्रो का काम अगले साल शुरू होने की उम्मीद है। शुक्रवार को यूपी कैबिनेट ने इस रूट की संशोधित डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी दे दी। इस रूट पर मेट्रो चलने से ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले लाखों लोगों को फायदा होगा। 17. 435 किलोमीटर लंबे इस रूट पर कुल 11 मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे।

नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एनएमआरसी) ने इस रूट की डीपीआर को मंजूरी के लिए इस साल 5 फरवरी को यूपी सरकार के पास भेजा था। यह रूट एक्वा लाइन का एक्सटेंशन रूट होगा। एक्वा लाइन पर सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा डिपो तक मेट्रो चल रही है। एनएमआरसी अधिकारियों का दावा है कि इस रूट पर मेट्रो चलने से 130 मीटर रोड पर लग रहे जाम में कमी आएगी।

अधिकारियों ने बताया कि अब इस डीपीआर को मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद निर्माण के लिए टेंडर जारी किया जाएगा। अगर केंद्र सरकार के स्तर से दो-तीन महीने में मंजूरी मिल जाती है, तब भी अगले साल के अंत तक ही काम शुरू हो पाएगा। अधिकारियों ने बताया कि मेट्रो चलने की शुरुआत में करीब सवा लाख राइडरशिप इस रूट पर रहेगी। मेट्रो चलाने के लिए लोग करीब 10 साल से मांग कर रहे। इसके लिए अब भी लगभग हर महीने ग्रेनो वेस्ट में रहने वाले लोग धरना प्रदर्शन कर रहे।

ये स्टेशन बनेंगे

नोएडा सेक्टर-51 मेट्रो स्टेशन से कुल 11 स्टेशन होंगे। नोएडा सेक्टर-61, 70, 122, 123, ग्रेटर नोएडा सेक्टर-4, सेक्टर-12 ईकोटेक, ग्रेटर नोएडा सेक्टर-2, 3, 10, 12 और नॉलेज पार्क-5। इनके बनने से जाम से राहत मिलेगी। साथ ही ग्रेटर नोएडा वेस्ट और नॉलेज पार्क तक लोग सुरक्षित और आरामदायक सफर कर सकेंगे।

नमो भारत चलने पर अटकलें

गाजियाबाद से ग्रेटर नोएडा वेस्ट होते हुए जेवर एयरपोर्ट तक नमो भारत चलना भी प्रस्तावित है। योजना के अनुसार गाजियाबाद से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के एक मूर्ति गोलचक्कर के आसपास आकर इसे जोड़ा जाना है। अब नॉलेज पार्क-5 तक मेट्रो को मंजूरी मिलने के बाद नमो भारत के रूट पर अटकलें लगने लगी हैं।

2991 करोड़ लागत आएगी

अधिकारियों ने बताया कि इस रूट पर मेट्रो चलाने पर 2991 करोड़ 60 लाख रुपये का खर्च आएगा। रूट बढ़ने और दो स्टेशन अतिरिक्त बनने से लागत करीब 794 करोड़ बढ़ गई है। इस बार मेट्रो का जो रूट बनाया गया है, वह पहले के मुकाबले करीब ढाई किलोमीटर लंबा है। पहले 14.958 किलोमीटर लंबा रूट बनाया गया था जो 17. 435 किलोमीटर हो गया है।

पांच साल पहले भी मिली थी मंजूरी

पांच साल पहले 9 दिसंबर 2019 को भी इस रूट को यूपी कैबिनेट से मंजूरी मिली थी, लेकिन वर्ष 2022 के अंत तक इसकी फाइल पर केंद्र सरकार की मुहर नहीं लग सकी। वर्ष 2023 के शुरुआत में केंद्र सरकार ने इसको देखना शुरू किया। एक्वा लाइन के सेक्टर-51 और ब्लू लाइन के सेक्टर-52 स्टेशन के बीच सीधी पहुंच न होने के कारण केंद्र ने आपत्ति लगा दी। इसके बाद नए सिरे से डीपीआर बनाई गई।

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