एमआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात पर सवाल उठाए हैं।

पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ब्रिक्स में मुलाकात के बाद भारत-चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में पेट्रोलिंग पॉइंट्स को लेकर समझौता किया गया। अब इस मुलाकात पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर चीन के साथ हुए गलवान झड़प के बाद देश को गुमराह करने का आरोप लगाया और समझौते की पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

आज तक को दिए एक इंटरव्यू में ओवैसी ने कहा, “जब 2020 में गलवान की घटना हुई थी, तब उन्होंने यही कहा था कि चीन हमारी जमीन पर घुसकर बैठा है। अब समझौते से यह साबित होता है कि प्रधानमंत्री ने उस वक्त देश से झूठ बोला था।” ओवैसी ने सरकार से यह मांग की कि यह समझौता संसद में लाया जाए ताकि देश को इसकी वास्तविकता का पता चल सके।

ओवैसी ने जोर दिया कि पूर्वी लद्दाख के पेट्रोलिंग पॉइंट्स पर अक्टूबर के बाद बर्फबारी शुरू हो जाएगी, जिससे हालात का आकलन अप्रैल तक ही किया जा सकेगा। ओवैसी ने चिंता जताई कि जिन 25 पेट्रोलिंग पॉइंट्स पर सेना पहले पेट्रोलिंग नहीं कर पा रही थी, क्या अब उन पर दोबारा पेट्रोलिंग संभव होगी? उन्होंने डोकलाम के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सरकार का दावा था कि चीन वहां से पीछे हट गया है, जबकि हकीकत में चीन अब भी डोकलाम में मौजूद है।

ओवैसी ने सवाल उठाते हुए कहा, “2020 के पहले जिन स्थानों पर भारतीय सेना पेट्रोलिंग करती थी अब वही पेट्रोलिंग बहाल की जा रही है, तो इसका मतलब साफ है कि चीन 2020 से हमारी जमीन पर कब्जा जमाए बैठा है।” उन्होंने बफर जोन की अवधारणा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि हम चीन को अपनी जमीन से बफर जोन बनाने का अधिकार क्यों दें? उन्होंने पूछा कि अगर हमारी सेना वहां पहले से तैनात है, तो क्या अब सेना वापस आएगी?

ओवैसी ने कहा, “शीतकालीन सत्र में हम इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे और सरकार से स्पष्टीकरण मांगेगे कि आखिर पिछले चार साल से देश को गुमराह किया जा रहा है और 20 दौर की बातचीत के बाद भी कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। क्या इस समझौते के तहत डी-एस्कलेशन और डीइंडक्शन होगा और क्या हमारी सेना 50 हजार जवानों के साथ वापस लौटेगी?”

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