भारत में लापता लड़कियां
भारत में लापता लड़कियां: एक डरावनी सच्चाई जो रोज़ हमारे बीच घट रही है
देश इन दिनों कोलकाता डॉक्टर रेप-मर्डर केस को लेकर उबाल पर है। पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक लोग सड़कों पर उतरकर न्याय की मांग कर रहे हैं। लेकिन इसी गुस्से और आक्रोश के बीच एक और सच्चाई है, जो कहीं ज्यादा डरावनी है। यह सच्चाई है भारत में लापता लड़कियां—जो हर दिन, हर घंटे, हमारी आंखों के सामने गायब हो रही हैं।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट बताती है कि भारत में हर रोज औसतन 345 लड़कियां और महिलाएं या तो लापता हो जाती हैं या उन्हें गायब कर दिया जाता है। यह आंकड़ा किसी एक राज्य या शहर का नहीं, बल्कि पूरे देश की तस्वीर है।
NCRB रिपोर्ट 2022: हर दिन क्या हो रहा है?
NCRB की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, रोज़ाना:
- 170 लड़कियां अपहरण (Kidnapping) का शिकार होती हैं
- 172 लड़कियां लापता (Missing) दर्ज की जाती हैं
- करीब 3 लड़कियों की मानव तस्करी (Human Trafficking) कर दी जाती है
इनमें से कुछ लड़कियां समय के साथ मिल जाती हैं, लेकिन बड़ी संख्या ऐसी है जिनका आज तक कोई सुराग नहीं मिल पाया।
3 साल में 13 लाख से ज्यादा महिलाएं और लड़कियां गायब
जुलाई 2023 में गृह मंत्रालय द्वारा संसद में पेश की गई रिपोर्ट ने पूरे देश को झकझोर दिया। NCRB के आंकड़ों के आधार पर बताया गया कि:
- 2019 से 2021 के बीच 13.13 लाख से अधिक महिलाएं और लड़कियां लापता हुईं
- इनमें:
- 18 साल से ऊपर की 10,61,648 महिलाएं
- 18 साल से कम उम्र की 2,51,430 लड़कियां शामिल हैं
यह आंकड़ा बताता है कि यह संकट सिर्फ नाबालिगों तक सीमित नहीं, बल्कि हर उम्र की महिलाओं को अपनी चपेट में ले रहा है।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा गायब हो रहीं महिलाएं और लड़कियां?
राज्यवार आंकड़े स्थिति को और भयावह बना देते हैं:
- मध्य प्रदेश
- महिलाएं: 1,60,180
- लड़कियां: 38,234
- पश्चिम बंगाल
- महिलाएं: 1,56,905
- लड़कियां: 36,606
- महाराष्ट्र
- महिलाएं: 1,78,400
- लड़कियां: 13,033
ये तीन राज्य लापता महिलाओं और लड़कियों के मामलों में सबसे ऊपर हैं।
तस्करी, अपहरण और लापता: कौन सबसे ज्यादा शिकार?
NCRB के मुताबिक साल 2022 में:
- 2250 मानव तस्करी के मामले दर्ज हुए
- कुल पीड़ित: 6,036
- इनमें 1,059 लड़कियां शामिल थीं
इसके अलावा:
- 62,099 लड़कियों के अपहरण के मामले
- 62,946 लड़कियों के लापता होने के मामले दर्ज किए गए
हालांकि कई लड़कियों को बचा लिया गया, लेकिन हजारों ऐसी हैं जिनका आज तक कोई पता नहीं चला।
समाज और सिस्टम के लिए बड़ा सवाल
भारत में लापता लड़कियां सिर्फ एक आंकड़ा नहीं हैं, बल्कि:
- टूटी हुई ज़िंदगियां
- बिखरे हुए परिवार
- और सिस्टम की असफलता की कहानी हैं
यह सवाल अब और टाला नहीं जा सकता कि:
- आखिर इतनी बड़ी संख्या में लड़कियां कहां जा रही हैं?
- तस्करी के नेटवर्क कितने मजबूत हैं?
- और जिम्मेदारी किसकी है?