मॉब लिंचिंग कांड
बिलासपुर में मॉब लिंचिंग की एक खौफनाक घटना सामने आई, जिसमें जादू टोना के संदेह पर एक पिता और उसके दो बेटों की बेरहमी से पिटाई की गई। यह घटना न केवल कानूनी चूक को उजागर करती है, बल्कि सिस्टम की नाकामी का भी उदाहरण बन चुकी है। हाईकोर्ट ने इस मामले में डीजीपी से विभागीय जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है, और मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2025 को तय की गई है।
मामला क्या था?
13 मार्च 2025 को अभनपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में कुछ ग्रामीणों ने तिलक साहू पर काला जादू करने का आरोप लगाते हुए उसकी बुरी तरह पिटाई शुरू कर दी। तिलक साहू ने इस बारे में अपने पिता अमर सिंह साहू और भाई नरेश साहू को सूचित किया, जो मौके पर पहुंचे। इसके बाद, ग्रामीणों ने इन तीनों को अर्धनग्न कर गांव में घुमाया और मुंह में कालिख पोतकर जूते की माला पहनने को मजबूर किया। रात भर इन्हें चौराहे पर बंधक बनाकर रखा गया।
पुलिस की चूक और न्यायिक कार्रवाई
अगली सुबह, जब डायल 112 को इस घटना की सूचना मिली, तो पुलिस ने मौके पर जाकर पीड़ितों से एक कागज पर हस्ताक्षर करवा लिए, जिसमें लिखा था कि वे कोई शिकायत नहीं करेंगे। इसके बाद पुलिस ने इन तीनों को गांव के बाहर छोड़ दिया। इस पुलिस कार्रवाई के बाद पीड़ितों ने न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आवेदन दिया और मामले को संज्ञान में लिया गया। कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ टोनही प्रताड़ना अधिनियम और अन्य धाराओं के तहत जुर्म दर्ज करने का आदेश दिया।
पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई
मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर सख्त ऐतराज जताया गया। पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद कोर्ट ने एसपी रायपुर, आईजी रायपुर, और डीजीपी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। कोर्ट ने एसएचओ और एसआई को दोषी ठहराया।
डीजीपी का शपथपत्र
डीजीपी ने शपथपत्र पेश करते हुए कहा कि इस मामले में पुलिस अधिकारियों की गलतियों के बारे में कुछ चिंताएं जताई गई थीं। इसके आधार पर विभागीय स्तर पर जांच का आदेश दिया गया था। जांच में इंस्पेक्टर सिद्धेश्वर प्रताप सिंह और सब-इंस्पेक्टर नरसिंह साहू को दोषी पाया गया और उनके खिलाफ चार्जशीट दी गई।
कोर्ट का आदेश
कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों के आचरण पर लंबित रखा है। कोर्ट ने सार्वजनिक अपमान, भीड़ द्वारा हिंसा, और पुलिस की चूक के आरोपों को ध्यान में रखते हुए मामले को लंबित रखने का निर्णय लिया। इसके साथ ही, डीजीपी को दोषी अधिकारियों के खिलाफ चल रही विभागीय जांच के परिणामों को एक नया शपथपत्र दाखिल करके कोर्ट में प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2025 को तय की है। इस दौरान, न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि भीड़ हिंसा और पुलिस लापरवाही को लेकर की जा रही जांच के परिणामों पर पूरी तरह से ध्यान दिया जाएगा और आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।