“महिला आरक्षण पर मोदी सरकार का नया कदम: विशेष सत्र की संभावना, क्या है इसके पीछे की जल्दी?”

महिला आरक्षण संशोधन

महिला आरक्षण संशोधन: सरकार की रणनीति और विपक्षी दलों के सवाल
भारत में महिला आरक्षण ऐक्ट में संशोधन के लिए मोदी सरकार की तैयारी जोरों पर है। इस विषय पर हाल के दिनों में तेजी से बातचीत चल रही है, जिसमें सरकार विपक्षी दलों से भी संपर्क साधने में लगी है। मंगलवार को विपक्षी दलों ने इस पर बैठक की और सरकार से पूछा कि आखिर वह महिला आरक्षण में क्या बदलाव चाहते हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि अगर सरकार संशोधन के बारे में विस्तृत जानकारी दे, तो वे अपनी राय स्पष्ट कर सकेंगे कि वे इस कदम का समर्थन करेंगे या नहीं।

इस बीच, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने संसदीय कार्य मंत्री को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर चर्चा की। वहीं, सरकार इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों को संतुष्ट करने की कोशिश कर रही है। गृह मंत्री अमित शाह खुद इस मामले में विपक्ष से संवाद कर रहे हैं, ताकि महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए एक मजबूत सहमति बन सके।

विशेष सत्र का विचार और सरकार की जल्दबाजी
इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए सरकार ने यह संकेत दिया है कि महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को जल्दी पारित करने के लिए एक विशेष सत्र भी बुलाया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, सरकार यह विकल्प भी विचार कर रही है कि यदि वर्तमान सत्र में सहमति बन जाती है तो इसे बढ़ाकर विधेयक लाया जा सकता है। लेकिन अगर ऐसा नहीं हो पाता, तो फिर विशेष सत्र बुलाने या मॉनसून सत्र तक इंतजार करने का विकल्प भी मौजूद है।

सरकार की इस जल्दबाजी की वजह यह है कि यदि सीटों की संख्या बढ़ाई जाती है तो परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होगी, और चुनाव आयोग को इस पर काफी समय खर्च करना होगा। परिसीमन के लिए कम से कम दो साल का वक्त चाहिए, और इसके पूरा होने तक 2026 का मार्च आ सकता है, जिससे महिला आरक्षण संशोधन के प्रभाव का आकलन समय से पहले किया जा सके। सरकार चाहती है कि विधेयक को पारित करने में कोई विवाद न हो और इसे पूरी प्रक्रिया के साथ लागू किया जाए।

जनगणना के आधार पर बदलाव: दक्षिण भारत के राज्यों को मिली राहत
महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। 2011 की जनगणना को आधार मानते हुए आरक्षण लागू किया जाएगा। इससे दक्षिण भारत के राज्यों की चिंताओं को दूर किया गया है, क्योंकि उन्होंने आबादी को नियंत्रित किया है और अब उनकी सीटों का अनुपात कम होने की संभावना थी।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और आंध्र प्रदेश के चंद्रबाबू नायडू जैसे नेताओं ने अपनी चिंता जाहिर की थी कि यदि उनकी सीटों की संख्या कम होती है तो यह जनसंख्या नियंत्रण की सजा के समान होगा। 2011 की जनगणना को आधार मानने से दक्षिण भारत के दलों को राहत मिली है, और अब टीडीपी, वाईएसआर और डीएमके जैसे दलों के समर्थन की उम्मीद जताई जा रही है।

महिला आरक्षण के लिए सीटों की संख्या में बढ़ोतरी
लोकसभा में महिला आरक्षण लागू करने के लिए सरकार का प्रस्ताव है कि सीटों की संख्या को 50 फीसदी बढ़ाया जाए, जिससे कुल सीटों की संख्या 816 तक पहुंच जाएगी। इसके बाद, यूपी की सीटों की संख्या बढ़कर 120 हो जाएगी, महाराष्ट्र से 72 सांसद होंगे, और बिहार के लिए 60 सांसद होंगे। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में सीटों की संख्या 42 से बढ़कर 63 हो जाएगी। इस बदलाव से विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधित्व में संतुलन बनेगा, और महिला आरक्षण के लिए ज्यादा सीटें भी सुनिश्चित हो सकेंगी।

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