‘मोदी जी जाति जनगणना बोलने तक से डरते हैं…’, आरक्षण पर घिरे कांग्रेस नेता राहुल गांधी का बीजेपी पर पलटवार

हरियाणा में विधानसभा चुनाव हैं और आरक्षण के मसले पर बीजेपी से लेकर बीएसपी तक कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान के बहाने हमलावर है. इस बीच, सोमवार को राहुल गांधी ने पलटवार किया है और बीजेपी को बहुजन विरोधी बताया है. राहुल ने कहा, बहुजन विरोधी बीजेपी चाहे कितना भी झूठ फैला ले, हम आरक्षण पर आंच तक नहीं आने देंगे.

राहुल गांधी का कहना था कि हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक एक विस्तृत जाति जनगणना ना हो जाए. आरक्षण से 50% की सीमा हटाकर हर वर्ग को उनका हक, हिस्सेदारी और न्याय ना मिल जाए और जनगणना से प्राप्त जानकारी भविष्य की नीतियों का आधार ना बन जाएं.

राहुल गांधी ने आगे कहा, मोदी जी ‘जाति जनगणना’ बोलने तक से डरते हैं, वो नहीं चाहते हैं कि बहुजनों को उनका हक मिले. मैं फिर से दोहराता हूं- मेरे लिए यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है. बहुजनों को न्याय दिलाना ही मेरे जीवन का मिशन है.

बता दें कि राहुल गांधी इसी महीने सितंबर में अमेरिकी दौरे पर गए थे. उन्होंने अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स को संबोधित किया. स्टूडेंट्स ने जब राहुल से भारत में रिजर्वेशन को लेकर सवाल किया और यह पूछा कि ये कब तक जारी रहेगा? इस पर राहुल गांधी ने कहा, कांग्रेस पार्टी आरक्षण खत्म करने के बारे में तब सोचेगी, जब भारत भेदभाव रहित होगी और आरक्षण के लिहाज से निष्पक्षता होगी. अभी ऐसा नहीं है.

राहुल का कहना था कि समस्या यह है कि भारत की 90 फीसदी आबादी भागीदारी करने में सक्षम नहीं है. हम बीमारी का इलाज नहीं कर रहे हैं. यही समस्या है. ऐसे कई लोग हैं, जो उच्च जाति से हैं, जो कहते हैं कि हमने क्या गलत किया है? हमें क्यों दंडित किया जा रहा है? तो फिर आप इनमें से कुछ चीजों की आपूर्ति में नाटकीय रूप से वृद्धि के बारे में सोचते हैं. आप सत्ता के विकेंद्रीकरण के बारे में सोचते हैं.

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के बयान पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीधे हमला बोला था. शाह का कहना था कि देश को बांटने वाली और देश विरोधी बयान देने वाली ताकतों के खिलाफ खड़ा होना राहुल गांधी और कांग्रेस की आदत हो गई है. फिर चाहे वो जम्मू कश्मीर में देशविरोधी और आरक्षण विरोधी एजेंडा हो या फिर विदेशी प्लेटफॉर्म पर भारत विरोधी बयान देना. राहुल गांधी ने हमेशा देश की भावनाएं आहत की हैं.

शाह का कहना था कि राहुल गांधी का बयान क्षेत्रवाद, धर्म और भाषाई मतभेदों की तर्ज पर दरार पैदा करने की कांग्रेस की राजनीति को उजागर करता है. देश से आरक्षण खत्म करने के बारे में बोलकर राहुल गांधी एक बार फिर कांग्रेस के आरक्षण विरोधी चेहरे को बाहर ले आए हैं. जो विचार उनके मन में थे, वे शब्द बनकर बाहर आ गए हैं. मैं राहुल गांधी से कहना चाहता हूं कि जब तक बीजेपी है, कोई भी आरक्षण को खत्म नहीं कर सकता और ना ही कोई देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर सकता है.

बसपा प्रमुख मायावती ने एक्स पर पोस्ट में कहा था, लंबे समय तक केंद्र की सत्ता में रहते हुए कांग्रेस की सरकार ने ओबीसी आरक्षण को लागू नहीं किया. देश में जातिगत आधार पर जनगणना नहीं होने दी और अब यह पार्टी इसकी आड़ में सत्ता में आने का सपना देख रही है. इनके नाटक से सचेत रहें, जो आगे भी कभी जातीय जनगणना नहीं करा पाएगी. इनके द्वारा देश में आरक्षण की सीमा को 50 प्रतिशत से बढ़ाने की बात भी छलावा है, क्योंकि इस मामले में अगर इनकी नीयत साफ होती तो कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों में यह कार्य जरूर कर लिया गया होता. कांग्रेस ने ना तो ओबीसी आरक्षण लागू किया और ना ही SC/ST आरक्षण को सही से लागू किया.

विवाद बढ़ा तो राहुल गांधी की तरफ से सफाई आई. वाशिंगटन डीसी में राहुल ने कहा, मेरे बयान को गलत तरीके से दिखाया गया है. हम जो कह रहे हैं, वो सिर्फ आरक्षण के विचार से अलग है. जो चल रहा है, हम उसकी व्यापक समझ चाहते हैं और फिर इसे ठीक करने के लिए नीतियों की एक सीरीज लागू करना चाहते हैं. आरक्षण भी उनमें से एक है. हम आरक्षण को 50 प्रतिशत से आगे बढ़ाने जा रहे हैं. मैं बार-बार यह कहता रहा हूं और कभी भी आरक्षण के खिलाफ नहीं रहा हूं. कल किसी ने मेरे बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया कि मैं आरक्षण के खिलाफ हूं. लेकिन मैं यह स्पष्ट कर दूं कि मैं आरक्षण के खिलाफ नहीं हूं. हम चाहते हैं कि आरक्षण 50% हो.

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