चेन्नई, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 19 नवंबर को कोयंबटूर में दक्षिण भारत प्राकृतिक कृषि शिखर सम्मेलन-2025 का उद्घाटन करेंगे। इसका उद्देश्य सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना, सुरक्षित खाद्य उत्पादन सुनिश्चित करना तथा किसानों की आजीविका में सुधार लाना है।इस तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन का विषय है “भविष्य के लिए खेती, परंपरा में निहित” है जिसका आयोजन कपड़ा नगरी के विशाल कोडिशिया व्यापार मेला परिसर में होगा।
श्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि हमारे भविष्य का समाधान अपनी जड़ों की ओर लौटने में निहित है। उन्होंने कहा कि प्रकृति दोहन करने वाला कोई संसाधन नहीं, बल्कि सम्मान योग्य भागीदार है। सूत्रों के अनुसार दक्षिण भारत प्राकृतिक कृषि शिखर सम्मेलन का आयोजन स्थायी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने, सुरक्षित खाद्य उत्पादन सुनिश्चित करने, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को पुनर्जीवित करने तथा किसानों की आजीविका में सुधार लाने के लिए किया जा रहा है।
भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति और परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) जैसी राष्ट्रीय पहलों से प्रेरित यह शिखर सम्मेलन एक मंच के अंतर्गत शोध, नीति, किसान अनुभव और उपभोक्ता आवश्यकताओं को समाहित करता है। इस शिखर सम्मेलन में 30,000 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने का अनुमान है, जिसमें किसान, कृषि उद्यमी, नीति निर्माता, प्राकृतिक कृषि समर्थक, स्टार्ट-अप, शिक्षाविद, उपभोक्ता समूह और युवा नेता शामिल होंगे।
इसका उद्देश्य प्राकृतिक खेती एवं पारंपरिक खाद्य प्रणालियों को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देना; किसान-उत्पादक संगठनों एवं ग्रामीण उद्यमियों के लिए बाजार संपर्क बनाना, जैविक आदानों, कृषि प्रसंस्करण, पर्यावरण-पैकेजिंग और स्वदेशी प्रौद्योगिकी में नवाचारों एवं उपकरणों का प्रदर्शन करना; प्रशिक्षण, इन्क्यूबेशन और उद्यम विकास के माध्यम से युवाओं एवं महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ जलवायु अनुकूल कृषि और मृदा स्वास्थ्य जागरूकता को मजबूत करना है। शिखर सम्मेलन में कृषि क्षेत्र की विभिन्न तकनीकों, प्रौद्योगिकियों एवं समाधानों को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी भी शामिल होगी तथा आयोजन स्थल पर 300 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे।