बस्तर। सुरक्षा बलों और स्थानीय समाज की सक्रिय पहल से 200 से अधिक नक्सलियों ने शुक्रवार को आत्मसमर्पण किया और मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। आत्मसमर्पण करने वालों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज में शांति, विकास और सहअस्तित्व की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प जताया।
आत्मसमर्पण करने वालों का स्वागत बस्तर के समाज प्रमुख, मांझी, चलकी और अन्य सदस्यों ने पारंपरिक रीति-रिवाज से किया। स्वागत के दौरान समाज प्रमुखों ने कहा कि यह कदम क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है और अब समाज को साथ लेकर आगे बढ़ने का समय है।
प्रशासन की ओर से आत्मसमर्पित नक्सलियों को तत्काल कंटीनीव रिहैबिलिटेशन वेल-बीइंग चेकअप और शासन की पुनर्वास योजनाओं के तहत आर्थिक एवं कौशल-आधारित सहायता देने का आश्वासन दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय स्तर पर रिहैबिलिटेशन केंद्रों में उन्हें प्रशिक्षित कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे और जागरूकता कैम्प भी चलाए जाएंगे ताकि पुन: उकसावे का मौका न मिले।
सुरक्षा बलों ने बताया कि आत्मसमर्पण के दौरान एक 47 इंसास राइफल और सौ से अधिक अन्य हथियार भी जब्त कराए गए, जिससे क्षेत्र में असली हथियार व्यवस्था को कमजोर करने में मदद मिली है। अधिकारियों का कहना है कि हथियारों की रिकॉर्डिंग और सुरक्षित नष्ट/रिसायकल प्रक्रिया के बाद ही आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई पूरी की जाएगी।
स्थानीय प्रशासन ने आश्वस्त किया कि आत्मसमर्पित व्यक्तियों के पुनर्वास के साथ-साथ उन क्षेत्रों में विकास कार्यों को भी तेज किया जाएगा — सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष फोकस रहेगा ताकि युवाओं को वैकल्पिक अवसर मिले और वह भी मुख्यधारा से जुड़ें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रक्रिया पारदर्शी और समावेशी तरीके से आगे बढ़ाई जाती है तो बस्तर में लंबे समय से जारी हिंसा और अशांति को घटाने में यह क़दम निर्णायक साबित हो सकता है।