मोरिंगा परियोजना
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में किसानों की आय और पोषण सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में कुरूद कृषि महाविद्यालय में मोरिंगा आधारित परियोजना को छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, रायपुर द्वारा स्वीकृति मिली है। यह परियोजना कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुरूद में संचालित होगी और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध है।
परियोजना का नेतृत्व सहायक प्राध्यापक डॉ. पीयूष प्रधान करेंगे। एक वर्ष की अवधि वाली परियोजना का क्रियान्वयन प्रौद्योगिकी ग्राम केंद्र सिर्री (धमतरी) और प्रौद्योगिकी ग्राम केंद्र रामपुर (कबीरधाम) में किया जाएगा। प्रत्येक केंद्र पर लगभग 50 किसानों को प्रशिक्षण देकर प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जाएगा।
परियोजना का उद्देश्य
- मोरिंगा (सहजन) की उन्नत खेती और प्रसंस्करण तकनीक सिखाना
- किसानों को मूल्य संवर्धित उत्पादों जैसे मोरिंगा पाउडर, न्यूट्रीशन सप्लीमेंट, चाय और खाद्य पूरक तैयार करना सिखाना
- किसानों की आय में वृद्धि और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना
- महिला स्व-सहायता समूह और युवाओं के लिए सूक्ष्म उद्यमिता के अवसर पैदा करना
मोरिंगा: चमत्कारी पौधा
- प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और विटामिन से भरपूर
- कम लागत और न्यून जोखिम वाली फसल
- जलवायु परिवर्तन के बीच टिकाऊ विकल्प
- ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण उन्मूलन में सहायक
परियोजना का वित्तीय पहलू
- परियोजना के लिए लगभग 4.95 लाख रुपये स्वीकृत
- राशि में प्रशिक्षण, संसाधन व्यक्तियों का मानदेय और अन्य व्यवस्थाएं शामिल
- महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. नवनीत राणा के मार्गदर्शन में संचालन
कृषि नवाचार में राष्ट्रीय पहचान
- डॉ. ए. कुरैशी को उनके नवाचार “ट्री ट्रिमिंग शीयर विद लॉक” के डिज़ाइन के लिए भारत सरकार द्वारा पेटेंट प्रदान किया गया
- उपकरण वृक्षों की छंटाई को अधिक सुरक्षित, सुगम और प्रभावी बनाता है
- विशेष रूप से फलोद्यान और बागवानी किसानों के लिए उपयोगी
- श्रम लागत कम और कार्य दक्षता बढ़ाने में सहायक
भविष्य में लाभ
- वैकल्पिक उच्च आय वाली फसल को बढ़ावा
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा
- “पोषण वाटिका” और स्थानीय स्तर पर पोषण आहार उपलब्धता को सुदृढ़ करना
- आधुनिक तकनीक और नवाचार के माध्यम से किसानों के लिए सुरक्षित उपकरण उपलब्ध कराना