मुर्दे के नाम जमीन चढ़ाकर की हेराफेरी, नायब तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल फंसे

कानपुर में सदर तहसील के नायब तहसीलदार, कानूनगो व लेखपाल ने मिलीभगत करके पहले खतौनी से मृतक महिला का नाम हटाया। फिर तीनों बेटियों को सुने बिना पारिवारिक विरोधियों से मिलकर मृतक मां का नाम खतौनी में दर्ज कर दिया। एक महीने तक मृतक मां का नाम खतौनी में दर्ज रहने के बाद पारिवारिक विरोधियों से मिलकर उनका नाम चढ़ा दिया। कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने मृतक महिला के नाम को खतौनी में दर्ज करने को काननून गलत माना है। वहीं, धोखाधड़ी के मामले में बिठूर के पूर्व नायब तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश सीजेएम सूरज मिश्रा ने कोतवाली थानाप्रभारी को दिए हैं।

महाराजपुर निवासी झर्री ने कोर्ट में दिए प्रार्थना पत्र में कहा था कि उनकी मां नन्ही की तीन बेटियां चमेली, झर्री और ननकी हैं। मां की मौत के बाद बिठूर के नायब तहसीलदार ने 21 जनवरी 2012 को नन्हीं का नाम हटाकर तीनों बेटियों का नाम खतौनी में दर्ज करने का आदेश कर दिया। 15 जून 2016 को कार्यरत नायब तहसीलदार बिठूर ने पारिवारिक विरोधियों से मिलकर बिना तीनों बहनों का पक्ष सुने एक सितंबर 2017 को उनका नाम काटकर म़ृत नन्हीं का नाम खतौनी में दर्ज कर दिया।

इसके बाद पांच अक्तूबर 2017 को झर्री के पारिवारिक विरोधियों कालीदीन के बेटे बाबूराम, रामकिशोर, कृष्ण कुमार, शिवशंकर और वीरेंद्र कुमार का नाम खतौनी में दर्ज कर दिया गया। झर्री ने धोखाधड़ी व कूटरचना का आरोप लगाते हुए जून 2016 में कार्यरत बिठूर के नायब तहसीलदार, जून 2016 व सितंबर 2017 में तैनात कानूनगो और लेखपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की मांगी की थी। मृतक का नाम खतौनी में दर्ज करने को कानूनन गलत मानते हुए कोर्ट ने एफआईआर के आदेश कर दिए हैं।

कोर्ट ने की गंभीर टिप्पणी

कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की है। आदेश में कहा किसी लोक सेवक द्वारा कारित कूटरचना व धोखाधड़ी का कार्य उसके पदीय दायित्व के सम्यक निवर्हन के अनुक्रम में किया गया कार्य नहीं माना जा सकता है। इसलिए सभी पर संज्ञेय अपराध का मामला बनता है।

सीजेएम कोर्ट ने पुलिस की रिपोर्ट व शिकायकर्ता को सुनने के बाद दिया रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश

हाल में हुए जमीन के फर्जी मामलेकिसान बाबू सिंह की जमीन को फर्जी तरीके से दाखिल खारिज करने में नायब तहसीलदार हटाए गए। वहीं हंसपुरम में बीएसीएल कंपनी को फर्जी कब्जा देने में दो लेखपाल हो चुके निलंबित किए। मकसूदाबाद में सरकारी जमीन बेचने का ऑडियो वायरल होने पर लेखपाल का निलंबन। उधर मसवानपुर में तालाब की जमीन खरीदने पर लेखपाल को निलंबित किया जा चुका है।

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