आजीविका डबरी, जल संरक्षण, ग्रामीण रोजगार
लेख:
मुंगेली, छत्तीसगढ़:
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) के तहत एक छोटी-सी पहल ने ग्रामीण आजीविका को नई दिशा दी है। ग्राम पंचायत औराबांधा, विकासखण्ड लोरमी में निर्मित आजीविका डबरी अब जल संरक्षण, सिंचाई, और मछली पालन का प्रभावी और सशक्त माध्यम बन चुकी है। इस पहल ने न केवल स्थानीय किसानों के जीवन को बेहतर बनाया है, बल्कि इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं, जिससे पलायन में कमी आई है।
किशन सिंह की सफलता की कहानी
किशन सिंह, जो इस परियोजना के लाभार्थी हैं, ने बताया कि पहले उनके खेत में सिंचाई के लिए पानी की कमी बनी रहती थी, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होता था। लेकिन अब आजीविका डबरी के निर्माण के बाद उनके खेत में वर्षभर पानी उपलब्ध रहता है, जिससे सिंचाई की समस्या का समाधान हो गया है। साथ ही, डबरी में मछली पालन का काम भी शुरू हो गया है, जिससे अतिरिक्त आय का एक स्थायी स्रोत भी बन गया है।
योजना का प्रभाव
इस योजना को कलेक्टर कुन्दन कुमार और जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पाण्डेय के मार्गदर्शन में प्रभावी ढंग से लागू किया गया। 1.94 लाख रुपये की लागत से इस डबरी का निर्माण किया गया। इस कार्य के दौरान 792 मानव दिवस सृजित हुए, जिससे स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिला और पलायन की समस्या में भी कमी आई। यह कदम जल संरक्षण और भू-जल रिचार्ज को बढ़ावा देने के साथ-साथ कृषि और मछली पालन के लिए भी एक स्थिर और मजबूत आधार बन गया है।
बहुफसली खेती की ओर कदम
पहले जहां पानी की कमी के कारण फसल प्रभावित होती थी, वहीं अब सिंचाई सुविधा सुनिश्चित होने से किसान आत्मविश्वास के साथ बहुफसली खेती की ओर अग्रसर हो गए हैं। अब, खरीफ और रबी दोनों मौसमों में फसल उत्पादन की संभावना बढ़ गई है, जिससे किसानों की आय में सुधार हुआ है।
मछली पालन से स्थायी आय स्रोत
आजीविका डबरी में मछली पालन की योजना से अतिरिक्त आय का एक स्थायी स्रोत उत्पन्न हो रहा है। यह पहल परिवारों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण तरीका बन चुकी है, और यह ग्रामीण आर्थिक विकास की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है।
आगामी योजनाएं और लक्ष्य
2025-26 के लिए 285 डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 218 कार्य प्रारंभ हो चुके हैं और 20 डबरी निर्माण पूर्ण किए जा चुके हैं। शेष कार्यों को मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल से न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि यह कृषि, पशुपालन, और मत्स्य पालन को एकीकृत कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायित्व प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।