बैंकों के अधिकारियों की लापरवाही उजागर: म्यूल बैंक अकाउंट प्रकरण में एक्सिस, इंडियन ओवरसीज और रत्नाकर बैंक के अधिकारी गिरफ्तार

रायपुर। राजधानी में पुलिस की ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत बड़ी कार्रवाई सामने आई है। म्यूल बैंक अकाउंट प्रकरण में तीन बैंकों के अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने बैंक के ड्यू डिलीजेन्स (Due Diligence) और केवाईसी (KYC) नॉर्म्स का पालन नहीं किया तथा बैंक खाते खोलने के बदले ब्रोकरों से रकम ली। गिरफ्तार किए गए अधिकारियों में एक्सिस बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और रत्नाकर बैंक के एक-एक अधिकारी शामिल हैं।

पुलिस महानिरीक्षक रायपुर रेंज अमरेश मिश्रा ने साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट हुए म्यूल बैंक खातों की जांच के लिए विशेष योजना तैयार की थी। इस योजना के तहत रेंज साइबर थाना को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि म्यूल अकाउंट खोलने और उन्हें संचालित करने में शामिल खाता धारक, संवर्धक, प्रेरक, फर्जी सिम विक्रेता और बैंक अधिकारियों पर वैधानिक कार्रवाई की जाए।

इसी क्रम में थाना टिकरापारा में अपराध क्रमांक 229/25, थाना सिविल लाइन में अपराध क्रमांक 44/25 और थाना गुढियारी में अपराध क्रमांक 17/25 दर्ज किए गए। इन मामलों की विवेचना के दौरान पुलिस ने कई खाता धारकों और फर्जी सिम कार्ड विक्रेताओं को गिरफ्तार किया और तकनीकी जांच के आधार पर बैंक अधिकारियों की संलिप्तता भी पाई गई। जांच में सामने आया कि तीनों बैंक अधिकारी – एक्सिस बैंक के अभिनव सिंह, इंडियन ओवरसीज बैंक के प्रवीण वर्मा और रत्नाकर बैंक लिमिटेड के प्रीतेश शुक्ला – न केवल बैंकिंग नियमों की अनदेखी कर रहे थे, बल्कि ब्रोकरों से रकम लेकर संदिग्ध व्यक्तियों को खाते खोलने की अनुमति भी दे रहे थे। यह खाता आगे चलकर साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए म्यूल अकाउंट के रूप में उपयोग किए जाते थे।

गिरफ्तार बैंक अधिकारियों की पहचान:

अभिनव सिंह पिता नरेश सिंह, उम्र 32 वर्ष, पता – झंडा चौक सेक्टर-02, शिवानंद नगर, खमतराई, रायपुर (एक्सिस बैंक)।

प्रवीण वर्मा पिता लक्ष्मण प्रसाद वर्मा, उम्र 37 वर्ष, पता – रोहिणीपुरम फेस-1, बोरसी, पदमनाभपुर, दुर्ग (इंडियन ओवरसीज बैंक)।

प्रीतेश शुक्ला पिता लालजी शुक्ला, उम्र 32 वर्ष, पता – शिवानंद नगर, गुढियारी, रायपुर (रत्नाकर बैंक लिमिटेड)।

पुलिस ने बताया कि इन अधिकारियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। आगे की जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि कितने खातों को फर्जी तरीके से खोला गया और इन खातों के जरिए कितनी राशि का लेन-देन हुआ। इस कार्रवाई से साफ है कि साइबर अपराधी अब सिर्फ फर्जीवाड़ा करने वाले खाता धारकों या सिम विक्रेताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था की कमजोरियों और अंदरूनी मिलीभगत का भी फायदा उठा रहे हैं। यह स्थिति न केवल बैंक ग्राहकों के लिए खतरा है, बल्कि पूरे बैंकिंग सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है।

आईजी अमरेश मिश्रा ने कहा कि साइबर ठगी रोकने के लिए म्यूल अकाउंट की चेन तोड़ना बेहद जरूरी है। बैंक अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे खाता खोलने की प्रक्रिया में नियमों का पालन करें। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय व्यापारियों और आम जनता ने इस कार्रवाई की सराहना की है। लोगों का कहना है कि जब तक बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता नहीं आएगी और आंतरिक निगरानी मजबूत नहीं होगी, तब तक साइबर अपराधी आसानी से ठगी के लिए रास्ते निकालते रहेंगे। इस गिरफ्तारी ने न केवल साइबर ठगों के नेटवर्क को उजागर किया है, बल्कि उन बैंक अधिकारियों पर भी शिकंजा कस दिया है जो पैसे के लालच में नियमों की धज्जियां उड़ाकर अपराधियों की मदद कर रहे थे।

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