महिला सशक्तिकरण
लेख:
रायपुर, छत्तीसगढ़ – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में, छत्तीसगढ़ राज्य आज महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। इस दिशा में राज्य सरकार ने वर्ष 2023-24 को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। यह कदम केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि महिलाओं को राज्य के विकास यात्रा का केंद्र बनाने का सशक्त संकल्प है।
‘महतारी गौरव वर्ष’ – महिला सशक्तिकरण की नई पहल
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने कार्यकाल के पहले वर्ष को ‘विश्वास वर्ष’ के रूप में मनाया, जिसमें शासन-प्रशासन और जनता के बीच भरोसा बहाल किया गया। इसके बाद दूसरे वर्ष को ‘अटल निर्माण वर्ष’ के रूप में मनाते हुए, अधोसंरचना विकास और जनकल्याण योजनाओं को गति दी गई। अब ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में, महिलाओं को केंद्र में रखकर, राज्य की अधिकांश योजनाओं में उनका सशक्तिकरण किया जा रहा है। यह कदम राज्य सरकार की समावेशी और संवेदनशील विकास सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
महतारी वंदन योजना – आर्थिक सुरक्षा का आधार
महतारी वंदन योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार ने लगभग 70 लाख विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता देने का प्रावधान किया है। इस योजना के तहत अब तक 15,595 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के बैंक खातों में सीधे डीबीटी के माध्यम से जमा की जा चुकी है। हाल ही में, 24वीं किस्त के रूप में, 68 लाख से अधिक महिलाओं को 641 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई। यह आर्थिक सहयोग महिलाओं को न केवल आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि उन्हें स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों में निवेश करने का अवसर भी दे रहा है।
संघर्ष से स्वावलंबन तक – श्रीमती रोहनी पटेल की कहानी
बालोद जिले की श्रीमती रोहनी पटेल की कहानी महिला सशक्तिकरण का एक जीवंत उदाहरण है। पति की असमय मृत्यु के बाद, श्रीमती पटेल के लिए परिवार की जिम्मेदारी और बच्चों की पढ़ाई की चिंता एक बड़ी चुनौती बन गई थी। लेकिन महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित किया। उन्होंने बचत के साथ अपने खेत में सब्जी उत्पादन का कार्य शुरू किया। आज, श्रीमती पटेल ताजी सब्जियां बेचकर नियमित आय अर्जित कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में सफल रही हैं।
‘लखपति दीदी’ और आधुनिक तकनीक से पहचान – श्रीमती माहेश्वरी यादव और सीमा वर्मा
समीति माहेश्वरी यादव बलौदाबाजार जिले की एक उदाहरण हैं, जिन्होंने ‘बिहान’ कार्यक्रम से जुड़कर छोटे व्यवसाय की शुरुआत की और आज वे ‘लखपति दीदी’ के रूप में जानी जाती हैं। उनकी दुकान से उन्हें 1 से 1.5 लाख रुपये की वार्षिक आय हो रही है, जिससे उनके परिवार की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है।
वहीं, सुश्री सीमा वर्मा, जो बिलासपुर जिले के मस्तूरी क्षेत्र की रहने वाली हैं, ने ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त कर ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में अपनी नई पहचान बनाई। वे अब किसानों के खेतों में ड्रोन के माध्यम से कीटनाशक छिड़काव करती हैं और इससे उन्हें सम्मानजनक आय मिल रही है।
महिला कल्याण में बजट प्रावधान
राज्य सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए 8,245 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। इसके अंतर्गत:
- आंगनबाड़ी एवं पोषण योजनाओं के लिए 2,320 करोड़ रुपये,
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये,
- मिशन वात्सल्य के लिए 80 करोड़ रुपये,
- और रानी दुर्गावती योजना के लिए 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इसके साथ ही, 750 नए आंगनबाड़ी केंद्रों और 250 महतारी सदनों के निर्माण के लिए 117 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। ये कदम महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण
राज्य सरकार ने महिला सुरक्षा के क्षेत्र में भी प्रभावी कदम उठाए हैं। वन स्टॉप सेंटर, 181 महिला हेल्पलाइन, और डायल 112 के माध्यम से महिलाओं को संकट के समय त्वरित सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही, सुखद सहारा योजना के तहत 2 लाख 18 हजार से अधिक विधवा और परित्यक्ता महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है।
स्वावलंबन से नेतृत्व तक – महिला समूहों का सशक्तिकरण
राज्य में 42,000 से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों को रियायती ऋण प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया है। इसके अलावा रेडी-टू-ईट कार्य, डिजिटल सखी, दीदी ई-रिक्शा, और लखपति दीदी जैसी पहलें महिलाओं को नए आजीविका अवसर प्रदान कर रही हैं।