बंदूक छोड़, हुनर की ओर: आत्मसमर्पित माओवादियों की नई दिशा

आत्मसमर्पित नक्सली


उत्तर बस्तर कांकेर, जहां कभी नक्सली हिंसा और आतंक का साम्राज्य था, अब वहां के लोग अपनी मेहनत और कौशल से एक नई शुरुआत कर रहे हैं। यहां के चौगेल पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित माओवादियों द्वारा काष्ठ कला, सिलाई, इलेक्ट्रिशियन और ड्राइविंग जैसे हुनर सीखे जा रहे हैं, जिससे न केवल उनकी ज़िंदगी बदली है, बल्कि पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक नया बदलाव आ रहा है।

हुनर सीख रहे हैं वे हाथ जो कभी बंदूक थामते थे

कभी माओवादी हिंसा का हिस्सा रहे लोगों ने अब सृजनात्मक कार्य में अपनी ऊर्जा लगानी शुरू की है। भानुप्रतापपुर के पास स्थित ग्राम चौगेल के पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को अब विभिन्न प्रकार के कौशल विकास प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। इनमें से कुछ प्रमुख प्रशिक्षणों में काष्ठ कला से बनी नेम प्लेट, ग्राम पंचायतों के बोर्ड, की-रिंग और सजावटी सामान तैयार करना शामिल हैं। इसके साथ ही कपड़े का थैला और कार्यालयों के लिए बस्ता बनाने का भी काम हो रहा है।

कौशल विकास के साथ आत्मनिर्भरता की ओर कदम

कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के मार्गदर्शन में कांकेर जिला प्रशासन ने आत्मसमर्पित माओवादी युवकों को सिलाई, राजमिस्त्री, इलेक्ट्रिशियन और ड्राइविंग जैसे व्यवसायिक पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण दिया है। इसके साथ ही उन्हें स्वास्थ्य परीक्षण और मनोरंजन गतिविधियों का भी अवसर प्रदान किया गया है। यह पहल इस क्षेत्र के लिए एक नई दिशा की ओर अग्रसर हो रही है, क्योंकि हिंसा के रास्ते पर चलने वाले युवाओं को अब समाज की मुख्यधारा में लौटने के अवसर मिल रहे हैं।

कौशल विकास प्रशिक्षण का प्रभाव

चौगेल कैम्प ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र में एक कौशल प्रशिक्षण केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाई है। यहां पर कुल 40 आत्मसमर्पित नक्सलियों को विभिन्न प्रशिक्षणों के माध्यम से रोजगार के योग्य बनाया गया है। कृषि विभाग, मत्स्य पालन, पशुधन विकास और उद्यानिकी विभाग द्वारा आयोजित कार्यशालाओं से युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

रोजगार सृजन में कांकेर जिला बना पहले स्थान पर

नक्सल प्रभावित कांकेर जिला अब नक्सलियों के पुनर्वास और रोजगार सृजन में आदर्श बन चुका है। यहां के पुनर्वास केंद्र में प्रशिक्षित आत्मसमर्पित नक्सलियों को निजी क्षेत्र में नौकरी मिल रही है। सगनूराम आंचला, रोशन नेताम, बीरसिंह मंडावी, और संजय नेताम जैसे युवाओं को 15,000 रुपये मासिक वेतन पर नियुक्ति पत्र प्राप्त हुआ है। इन युवाओं ने असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन के रूप में प्रशिक्षण लिया था, और अब इन्हें निजी कंपनियों में रोजगार मिल चुका है।

प्रशिक्षण और पुनर्वास का नया अध्याय

पुनर्वास केंद्र में प्रशिक्षण उपरांत इन आत्मसमर्पित नक्सलियों को स्वस्थ जीवन और आजीविका के अवसर मिल रहे हैं। बीरसिंह मंडावी ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि चौगेल के कैम्प में उन्हें निःशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त हुआ, और अब उन्होंने नौकरी के साथ सम्मानजनक जीवन की शुरुआत की है। उन्होंने कहा, “यह कैम्प मेरी ज़िंदगी का पुनर्जन्म है, जहां से मुझे नई दिशा मिली है।”

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