छत्तीसगढ़ पर्यटन
छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की नई दिशा
रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में इन दिनों पर्यटन विकास की एक नई और सकारात्मक शुरुआत हो रही है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और हिवा कोचिंग एंड कंसल्टिंग की संस्थापक सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन का छत्तीसगढ़ में छह दिवसीय प्रवास राज्य के पर्यटन क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। उनका यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय आधारित सतत पर्यटन को वैश्विक मानकों से जोड़ने की ठोस पहल का हिस्सा था।
धुड़मारास में पारंपरिक स्वागत और सांस्कृतिक अनुभव
सुश्री किर्सी के बस्तर पहुंचने पर उनका स्वागत बड़े ही पारंपरिक तरीके से किया गया। धुड़मारास गांव में धुरवा डेरा होमस्टे में उनका स्वागत सिहाड़ी और महुए की माला पहनाकर किया गया। साथ ही धुरवा नृत्य और स्वागत गीतों के साथ ग्रामीणों ने अपनी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की। इस अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि यह आत्मीय स्वागत उनके लिए अत्यंत विशेष था और इसे कभी नहीं भूल पाएंगी। यह स्वागत बस्तर की सामाजिक एकजुटता और आत्मीयता का प्रतीक था।
स्थानीय खानपान का अनुभव
सुश्री किर्सी ने बस्तर के पारंपरिक और जैविक व्यंजनों का स्वाद भी लिया। कलम भाजी, सेमी और बोदई की सब्जी, केले की सब्जी, उड़द दाल, इमली की चटनी, कोसरा भात, और मंडिया पेज जैसे स्थानीय व्यंजनों ने उन्हें यहां की खाद्य परंपरा से परिचित कराया। बस्तर की जैव विविधता आधारित खाद्य संस्कृति विदेशी पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन सकती है और इसे वैश्विक मंच पर स्थान मिल सकता है।
सतत पर्यटन मॉडल पर चर्चा
यह प्रवास ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज अपग्रेड प्रोग्राम’ के मानकों के अनुरूप धुड़मारास और आस-पास के क्षेत्रों को विकसित करने पर केंद्रित था। सुश्री ह्यवैरिनेन ने धुरवा डेरा होमस्टे में रहकर स्थानीय समुदाय, स्वयं सहायता समूहों, युवाओं और पर्यटन हितधारकों के साथ सेवा गुणवत्ता, स्वच्छता प्रबंधन, डिजिटल प्रचार, ब्रांडिंग और होमस्टे संचालन के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर मार्गदर्शन दिया। यह पहल बस्तर के पर्यटन को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम हो सकती है।
चित्रकोट जलप्रपात और मेंदरी घूमर क्षेत्र का निरीक्षण
प्रवास के दौरान, सुश्री किर्सी ने चित्रकोट जलप्रपात का नौका विहार किया और वहां की पर्यटन संभावनाओं का अवलोकन किया। चित्रकोट पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है, लेकिन इस विशेषज्ञ की उपस्थिति ने इसे वैश्विक प्रचार अभियानों से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है। उन्होंने मेंदरी घूमर क्षेत्र में भी पर्यटन गतिविधियों को विस्तार देने पर चर्चा की, जिससे इस क्षेत्र में पर्यटन को नई दिशा मिल सकती है।
स्थानीय रोजगार और सामुदायिक विकास
सुश्री ह्यवैरिनेन का यह प्रवास बस्तर के लिए स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के स्थायी अवसरों का सृजन करने में सहायक हो सकता है। सामुदायिक पर्यटन को संस्थागत आधार मिलने से आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी और सतत विकास की अवधारणा को बल मिलेगा।
बस्तर की छवि में बदलाव
कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले बस्तर की छवि अब प्रकृति, संस्कृति और सामुदायिक समृद्धि के मॉडल के रूप में उभर रही है। यदि धुड़मारास ‘यूएन बेस्ट टूरिज्म विलेज’ मानकों पर सफलता से आगे बढ़ता है, तो यह मॉडल देश के अन्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लिए प्रेरणा बन सकता है।