छत्तीसगढ़ में वन रोपण का नया मॉडल! न्यूट्रिशन फ्लो तकनीक से नर्सरियों में बढ़ेगी उत्पादन क्षमता

न्यूट्रिशन फ्लो तकनीक


वन क्षेत्र में तकनीक का बड़ा कदम

रायपुर में छत्तीसगढ़ सरकार ने वन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में अहम पहल की है। वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा न्यूट्रिशन फ्लो तकनीक (NFT) को बढ़ावा देने के लिए विशेष बैठक आयोजित की गई।

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नर्सरियों में पौधों के उत्पादन, प्रबंधन और वन रोपण कार्यों में आधुनिक तकनीक अपनाकर गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाना है।


क्या है न्यूट्रिशन फ्लो तकनीक?

न्यूट्रिशन फ्लो तकनीक एक आधुनिक कृषि-पद्धति है, जिसमें पौधों को संतुलित पोषक तत्व नियंत्रित और वैज्ञानिक तरीके से उपलब्ध कराए जाते हैं।

इस तकनीक की प्रमुख विशेषताएं:

  • नियंत्रित मात्रा में पोषक तत्वों की आपूर्ति
  • कम पानी में अधिक उत्पादन
  • संसाधनों का बेहतर और संतुलित उपयोग
  • नियंत्रित वातावरण में स्वस्थ पौधों का विकास
  • पौधों की गुणवत्ता और जीवित रहने की दर में वृद्धि

विशेषज्ञों ने बैठक में इसके तकनीकी पहलुओं, व्यवहारिक उपयोग, लाभ और संभावित चुनौतियों पर विस्तृत जानकारी दी।


चरणबद्ध तरीके से होगा लागू

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि वन विकास निगम की नर्सरियों में इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

तय की गई रणनीति:

  • स्पष्ट कार्ययोजना और दीर्घकालिक रोडमैप तैयार करना
  • कर्मचारियों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण देना
  • पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पहले चरण की शुरुआत
  • परिणामों के आधार पर विस्तार की योजना

इससे न केवल पौधों की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि बड़े स्तर पर वन रोपण कार्यक्रमों को भी मजबूती मिलेगी।


क्यों है यह पहल महत्वपूर्ण?

  • वन क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा
  • सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में ठोस कदम
  • जल संरक्षण और संसाधनों का संतुलित उपयोग
  • आधुनिक कृषि-वानिकी तकनीकों का समावेश

छत्तीसगढ़ में वन संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में यह एक बड़ा और सकारात्मक कदम माना जा रहा है।


भविष्य की दिशा

सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक अपनाकर वन क्षेत्र को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाया जा सकता है। न्यूट्रिशन फ्लो तकनीक से तैयार पौधे अधिक स्वस्थ होंगे, जिससे वृक्षारोपण अभियानों की सफलता दर बढ़ेगी।

यह पहल बताती है कि छत्तीसगढ़ केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक और नवाचार को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में नई मिसाल कायम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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