एनआईए (नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी) ने सीपीआई (माओवादी) के 2 प्रमुख नेताओं विजय कुमार आर्य और उमेश चौधरी की गिरफ्तारी से जुड़े मामलों में बिहार में 7 स्थानों पर तलाशी ली. इस दौरान पुलिस ने जिंदा कारतूस और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की. मामले में 3 अन्य आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं. इन सभी के खिलाफ एनआईए ने आरोप पत्र दाखिल किया है.
एनआईए के मुताबिक तलाशी के दौरान इन लोगों के पास से डिजिटल डिवाइस जैसे मोबाइल फोन, सिम कार्ड, मेमोरी कार्ड आदि बरामद हुई है. इसके अलावा इनके पास से कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डायरियां भी मिली है. एनआई की तरफ से जांच लेवी संग्रह में सीपीआई (माओवादी) कैडरों की गतिविधियों का पता लगने के बाद की गई है.
इससे पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शुक्रवार को पंजाब में नांगल के वीएचपी नेता विकास बग्गा की हत्या के सिलसिले में तलाशी ली थी. इस हत्याकांड को विदेशी खालिस्तानी आतंकवादियों ने अंजाम दिया था.
एनआईए ने उन संदिग्धों से जुड़े दो स्थानों पर तलाशी ली. जिनके बारे में माना जाता है कि उन्होंने हत्या में शामिल आरोपियों के लिए रुकने की व्यवस्था की थी. तलाशी के दौरान कई डिजिटल डिवाइस और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी जब्त की गई.
यह छापेमारी हाई-प्रोफाइल मामले में इस्तेमाल किए गए अवैध हथियार और गोला-बारूद की आपूर्ति करने वाले एक प्रमुख आरोपी की गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद की गई. मामले में धरमिंद्र कुमार उर्फ कुणाल को 18 अगस्त को पंजाब के लुधियाना में एनआईए और दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की टीमों ने पकड़ा था.
आपको बता दें कि विकास प्रभाकर उर्फ विकास बग्गा की इस साल 13 अप्रैल को पंजाब के रूपनगर के नांगल में उनकी दुकान के अंदर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. एनआईए ने 9 मई 2024 को राज्य पुलिस से मामले को अपने हाथ में ले लिया था.
एनआईए की अब तक की जांच से पता चला है कि विश्व हिंदू परिषद नेता की हत्या का समन्वय और साजिश बीकेआई (बाबर खालसा इंटरनेशनल) के विदेश स्थित गुर्गों, हरजीत सिंह उर्फ लाडी, कुलबीर सिंह उर्फ सिद्धू और हरविंदर कुमार उर्फ सोनू ने गिरफ्तार आरोपियों के साथ मिलकर रची थी.