नीतीश कुमार के बेटे निशांत की राजनीति में एंट्री तय, JDU में मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी, कब होगा ऐलान?

नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जल्द सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं। उनके औपचारिक राजनीतिक प्रवेश की घोषणा बहुत जल्द की जा सकती है। मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पार्टी के भीतर निशांत को आगे लाने की मांग लगातार तेज होती जा रही है। इस खबर से जनता दल (यूनाइटेड) (जेडीयू) के कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है।

NDTV की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि निशांत कुमार इसी महीने राजनीतिक मैदान में उतर सकते हैं। हाल के दिनों में वे कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आए हैं। 1 मार्च को नीतीश कुमार के 75वें जन्मदिन के मौके पर भी वे उनके साथ दिखे थे। उन्होंने अपने पिता को केक खिलाया और मंदिर जाकर उनके लिए पूजा-अर्चना की।

विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व में मिले जनादेश के बाद से ही निशांत की भूमिका को लेकर पार्टी में चर्चा तेज है। जेडीयू सूत्रों के मुताबिक, मार्च में दिल्ली में होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उनकी सक्रिय भूमिका को लेकर संकेत मिल सकते हैं।

पिछले विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद निशांत कुमार की सार्वजनिक कार्यक्रमों में उपस्थिति बढ़ी है। गांधी मैदान में हुए शपथ ग्रहण समारोह में भी वे प्रमुख पंक्ति में बैठे नजर आए थे। जब उनसे राजनीति में आने को लेकर सवाल पूछा गया था, तब उन्होंने सीधे जवाब से बचते हुए मुस्कराकर बात टाल दी थी।

इधर पटना समेत कई जिलों में पोस्टर-बैनर और सोशल मीडिया अभियानों के जरिए उन्हें पार्टी का भविष्य और संभावित उत्तराधिकारी बताया जा रहा है। “नीतीश सेवक, मांगे निशांत” जैसे नारे भी चर्चा में रहे हैं। समर्थकों का दावा है कि बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उन्हें सक्रिय राजनीति में देखना चाहते हैं।

जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी कहा है कि कार्यकर्ता निशांत को पार्टी में देखना चाहते हैं, हालांकि अंतिम निर्णय उन्हीं पर निर्भर करेगा। सहयोगी दल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के नेता और मंत्री जीतन राम मांझी समेत अन्य नेताओं ने भी निशांत के राजनीति में आने का समर्थन किया है।

हालांकि अब तकनीतीश कुमार ने अपने बेटे के राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। वे लंबे समय से परिवारवाद के विरोधी रहे हैं और खासकर राष्ट्रीय जनता दल पर इस मुद्दे को लेकर निशाना साधते रहे हैं। लेकिन मौजूदा हालात में पार्टी के भीतर यह सवाल उठने लगा है कि भविष्य में जेडीयू की कमान कौन संभालेगा।

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